rashtriya suraksha salahakar board : पूर्व रॉ प्रमुख आलोक जोशी के नेतृत्व में सुरक्षा सलाहकार बोर्ड का पुनर्गठन
rashtriya suraksha salahakar board : नई दिल्ली: एक बड़े घटनाक्रम में, केंद्र सरकार ने बुधवार को पूर्व रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) प्रमुख आलोक जोशी की अध्यक्षता में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (एनएसएबी) का पुनर्गठन किया। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा संबंधी मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) की एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद लिया गया, जो प्रधानमंत्री के आवास पर आयोजित की गई थी।
एनएसएबी क्या है?
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (एनएसएबी) एक संस्था है जो राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों पर दीर्घकालिक विश्लेषण और नीतिगत सिफारिशें प्रदान करती है। इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (एनएससी) को सलाह देना है, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री स्वयं करते हैं। एनएसएबी सरकार से बाहर के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों का एक निकाय है, जिसमें प्रतिष्ठित विशेषज्ञ, सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी, राजनयिक, शिक्षाविद और नागरिक समाज के विशेषज्ञ शामिल हैं।
पुनर्गठन की ज़रूरत
एनएसएबी के पुनर्गठन का निर्णय पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद लिया गया, जहां पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने 26 पर्यटकों की हत्या कर दी थी। इस घटना ने देश की सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर किया और एनएसएबी के पुनर्गठन की आवश्यकता को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया। पुनर्गठित एनएसएबी उभरती राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों का अध्ययन करेगा और सरकार को समकालीन सुरक्षा खतरों को ध्यान में रखते हुए सिफारिशें देगा।
नए सदस्य
पुनर्गठित 15 सदस्यीय बोर्ड में सशस्त्र बलों, पुलिस और राजनयिक सेवाओं के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों का मिश्रण शामिल है। नए सदस्यों में शामिल हैं:
- एयर मार्शल पीएम सिन्हा (पूर्व पश्चिमी एयर कमांडर)
- लेफ्टिनेंट जनरल एके सिंह (पूर्व दक्षिणी सेना कमांडर)
- रियर एडमिरल मोंटी खन्ना
- पंकज सरन
- लेफ्टिनेंट जनरल एके सिंह (सेवानिवृत्त)
- एबी माथुर
- प्रोफेसर के कामकोटि
- बीएस मूर्ति
- एयर मार्शल पंकज ‘पंकी’ सिन्हा (सेवानिवृत्त)
- मनमोहन सिंह और राजीव रंजन वर्मा (दोनों भारतीय पुलिस सेवा)
- देवेंद्र शर्मा
- बिमल पटेल
- आर राधाकृष्णन
- वाइस एडमिरल पीएस चीमा (सेवानिवृत्त)
- वेंकटेश वर्मा, एक सेवानिवृत्त भारतीय विदेश सेवा अधिकारी
सुरक्षा विशेषज्ञों की राय
जाने-माने सुरक्षा विशेषज्ञ सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर बीके खन्ना ने कहा, “राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड का पुनर्गठन केंद्र सरकार द्वारा लिया गया एक अच्छा निर्णय है। नए निकाय में कई वरिष्ठ सरकारी अधिकारी शामिल हैं, जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा पर विशेषज्ञता हासिल है। और इससे निश्चित रूप से देश के सुरक्षा परिप्रेक्ष्य को बढ़ावा मिलेगा.”
ब्रिगेडियर खन्ना ने आगे कहा, “संशोधित एनएसएबी निश्चित रूप से समकालीन सुरक्षा खतरे को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर सरकार को सुझाव दे सकता है।”
पुनर्गठन के फायदे
बेहतर नीतिगत सिफारिशें
पुनर्गठित एनएसएबी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद को अधिक प्रभावी और सटीक नीतिगत सिफारिशें प्रदान करेगा। इसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों का मिश्रण होगा, जो विभिन्न दृष्टिकोणों से सुरक्षा मुद्दों का विश्लेषण करेगा।
तेज प्रतिक्रिया
नए सदस्यों के साथ, एनएसएबी सुरक्षा चुनौतियों का तेजी से विश्लेषण कर सकेगा और सरकार को तेजी से सिफारिशें दे सकेगा। यह देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में मददगार होगा।
विविधता और विशेषज्ञता
पुनर्गठित एनएसएबी में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल हैं, जिनमें सेना, पुलिस, राजनयिक सेवाएं और नागरिक समाज शामिल हैं। यह विविधता सुनिश्चित करेगी कि सुरक्षा मुद्दों का समग्र विश्लेषण हो सके।
भविष्य की चुनौतियां
हालाँकि एनएसएबी का पुनर्गठन एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। इनमें से कुछ हैं:
सुरक्षा खतरे का तेजी से बदलाव
समकालीन सुरक्षा परिप्रेक्ष्य में खतरे तेजी से बदलते रहते हैं। एनएसएबी को इन बदलावों के साथ कदम मिलाकर चलना होगा और समय पर सिफारिशें देनी होंगी।
अंतर्विभागीय समन्वय
एनएसएबी को विभिन्न सरकारी विभागों और एजेंसियों के साथ समन्वय बनाए रखना होगा ताकि सुरक्षा नीतियों का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन हो सके।
तकनीकी चुनौतियां
आधुनिक सुरक्षा खतरे अक्सर तकनीकी प्रकृति के होते हैं। एनएसएबी को इन तकनीकी चुनौतियों का सामना करने के लिए अपने विशेषज्ञों को नवीनतम तकनीकों से अवगत कराना होगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड का पुनर्गठन एक महत्वपूर्ण कदम है जो देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में मददगार होगा। पूर्व रॉ प्रमुख आलोक जोशी के नेतृत्व में, पुनर्गठित एनएसएबी समकालीन सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने और सरकार को प्रभावी नीतिगत सिफारिशें देने में सक्षम होगा। इससे देश के सुरक्षा परिप्रेक्ष्य को बढ़ावा मिलेगा और भारत को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलेगी।
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