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ब्रिक्स से दूरी या रणनीति: मोदी नहीं होंगे शामिल, अमेरिका का दबाव या भारत की चुप्पी?

Shital Sharma September 6, 2025

modi brics summit 2025 india us relations: 8 सितंबर को होने वाली BRICS वर्चुअल समिट में जब बाकी देशों के नेता शामिल होंगे, तो भारत की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नहीं, बल्कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर मौजूद होंगे। एक सादा-सा फैसला, लेकिन इसके पीछे की राजनीति और वैश्विक दबाव बेहद जटिल है।

modi brics summit 2025 india us relations jaishankar brics representative

क्या यह सिर्फ एक सामान्य प्रतिनिधित्व है या फिर दुनिया की दो बड़ी शक्तियों अमेरिका और ब्रिक्स के बीच खिंचती रस्साकशी में भारत का एक सोचा-समझा कदम? आइए इस पर दिल से बात करते हैं।

modi brics summit 2025 india us relations: मोदी की गैर-मौजूदगी: संकेत क्या है?

जब भारत जैसे देश का प्रधानमंत्री किसी वैश्विक मंच से दूरी बनाता है, तो सवाल उठना लाज़िमी है। मोदी का BRICS से दूर रहना सिर्फ एक कार्यक्रम से न जुड़ने का मामला नहीं, बल्कि एक संदेश है बहुत ही स्पष्ट, पर बिना बोले।

राजनयिक हलकों में फुसफुसाहट है कि भारत 2026 में BRICS की अध्यक्षता करने से पहले अमेरिका को नाराज़ नहीं करना चाहता। खासकर तब, जब अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ लगाकर यह साफ कर दिया कि या तो BRICS छोड़ो, या हमारे बाज़ार से दूर रहो।

अमेरिकी शर्तें: व्यापार या दबाव?

अमेरिका के उद्योग मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने खुले तौर पर कहा कि भारत को तीन बातें करनी होंगी:

  1. रूस से तेल खरीदना बंद करो,

  2. BRICS छोड़ो,

  3. और अमेरिका का समर्थन करो।

यह कोई सुझाव नहीं, बल्कि शर्तें हैं। अमेरिका को डर है कि अगर भारत BRICS में रहा, तो वह रूस और चीन के लिए “पुल” बन सकता है एक ऐसा पुल जो डॉलर की सत्ता को चुनौती दे सकता है।

रूसी तेल और अमेरिकी नाराज़गी

भारत ने रूस से तेल खरीद में जबरदस्त बढ़ोतरी की है जहां पहले ये सिर्फ 2% था, अब 40% तक पहुंच चुका है। अमेरिका को ये रास नहीं आ रहा। उनका तर्क है कि इससे रूस की अर्थव्यवस्था को ताकत मिलती है, जो यूक्रेन युद्ध को और लंबा खींच सकता है।

brics condemns pahalgam attack supports iran against israel

लेकिन भारत का अपना नज़रिया है “हम अपनी ज़रूरत और अपने फायदे को देखते हैं, किसी के दबाव में नहीं आते।”
क्या यही “भारत पहले” की असली परिभाषा है?

 BRICS की राजनीति और भारत का संतुलन

BRICS अब सिर्फ पांच देशों का संगठन नहीं, बल्कि एक वैकल्पिक विश्व व्यवस्था की सोच बन चुका है। डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिशें, वैश्विक दक्षिण की आवाज़ बनने की चाह, और पश्चिमी दबावों से आज़ादी यही BRICS की आत्मा है।

भारत इसमें अपनी भागीदारी को अमेरिका विरोध नहीं मानता, बल्कि संतुलन की नीति का हिस्सा मानता है। लेकिन अमेरिका को लगता है कि भारत का झुकाव BRICS की ओर, उसकी “इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटेजी” के खिलाफ है।

चुपचाप चलने वाली चाल

भारत न अमेरिका का दुश्मन बनना चाहता है, न BRICS से रिश्ता तोड़ना चाहता है। यही संतुलन भारत की विदेश नीति का मूल है ना ज़्यादा झुके, ना टकराए। मोदी का BRICS समिट से दूर रहना शायद इसी संतुलन का हिस्सा है। वो अमेरिका को भी संदेश देना चाहते हैं कि हम आपके साथ हैं, लेकिन बिना अपनी स्वतंत्रता खोए।

Read:- लाल किला परिसर से ₹1 करोड़ का कलश चोरी: 760 ग्राम सोने पर हीरे-पन्ने जड़े थे

Watch:- US ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया

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Shital Sharma

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i am contant writer last 10 Years, worked with Vision world news channel, Sadhna News, Bharat Samachar and many web portals.

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