middle east war attack: मिडिल ईस्ट एक बार फिर धधक रहा है. अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जंग आज पांचवें दिन में दाखिल हो गई है, और हालात हर घंटे ज्यादा गंभीर होते दिख रहे हैं. ईरान ने दावा किया है कि उसने दुबई में अमेरिकी दूतावास को निशाना बनाया, जबकि इजराइल ने पलटवार में तेहरान और बेरूत पर भीषण बमबारी की. शहरों में सायरन, धुएं के गुबार और बंद होते बाजार… जंग अब सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रही, आम जिंदगी भी इसकी चपेट में है।
ईरान का दावा: दो दिन में 650 अमेरिकी सैनिक मारे
ईरान की ताकतवर सैन्य इकाई इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि जवाबी हमलों में पहले 48 घंटों के भीतर करीब 650 अमेरिकी सैनिक मारे गए या घायल हुए हैं. हालांकि अमेरिका ने इन आंकड़ों को सिरे से खारिज किया है, और उन्हें भ्रामक प्रचार बताया.
ट्रम्प का बयान: ईरान पहले हमला करने वाला था
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार रात कहा कि अमेरिकी सेना को इजराइल के साथ मिलकर ईरान पर हमला करने का आदेश उन्होंने इसलिए दिया, क्योंकि “ईरान पहले वार करने की तैयारी में था”. व्हाइट हाउस के मुताबिक यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए लिया गया.
ईरान का पलटवार: खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकाने निशाने पर
संयुक्त अमेरिकी-इजराइली हमलों के बाद ईरान ने सऊदी अरब, दुबई और कुवैत में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोन की बौछार की. ईरानी मीडिया के मुताबिक अब तक इस युद्ध में 742 ईरानी नागरिकों और 6 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है, हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है.
हिंद महासागर में अमेरिकी जंगी जहाज पर हमला का दावा
IRGC ने यह भी दावा किया है कि उसने हिंद महासागर में एक अमेरिकी डिस्ट्रॉयर को निशाना बनाया, जो ईरान की सीमा से 600 किलोमीटर से ज्यादा दूर था. ईरान के प्रेस टीवी के अनुसार, जहाज पर उस वक्त हमला हुआ जब वह एक अमेरिकी टैंकर से फ्यूल भर रहा था. IRGC का कहना है कि “ग़दर-380” और “तलाईह” मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया, ग़दर-380 एक मीडियम रेंज बैलिस्टिक मिसाइल है जिसकी रेंज 2,000 किलोमीटर तक बताई जाती है.
रूस की चेतावनी, चीन का समर्थन
ईरान पर हमलों को लेकर रूस ने तीसरे विश्वयुद्ध की चेतावनी दी है. इससे पहले ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने संयुक्त बयान जारी कर अमेरिका और उसके सहयोगियों का समर्थन किया था. उधर चीन ने साफ कहा है कि वह ईरान के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है. इसका मतलब साफ है, ईरान के खिलाफ अब करीब 15 देश किसी न किसी रूप में एकजुट नजर आ रहे हैं. दूसरी ओर, खामेनेई की मौत के बाद ईरान का रुख और सख्त हो गया है, और संकेत मिल रहे हैं कि यह जंग फिलहाल थमने वाली नहीं.
