मेंस टॉयलेट में महिला सफाई कर्मचारी गलत
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस बात पर गहरी चिंता जताई कि पुरुष शौचालयों की सफाई के लिए महिला कर्मचारियों को नियुक्त करना न केवल अनुचित है, बल्कि यह लैंगिक संवेदनशीलता और गोपनीयता के मानकों के खिलाफ भी है। कोर्ट ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य स्वच्छता को बढ़ावा देना है, लेकिन ऐसी व्यवस्था जो सामाजिक और लैंगिक मानदंडों के विपरीत हो, स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने इस प्रथा को ग्राम पंचायत की योजनाओं से मेल न खाने वाला बताया और इसे तत्काल सुधारने की आवश्यकता पर बल दिया।

Men’s Toilet Cleaning by Female Workers: ग्राम प्रधान का पक्ष
सुनवाई के दौरान ज्योना ग्राम पंचायत के प्रधान ने कोर्ट को बताया कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत उनकी ग्राम सभा में बने महिला और पुरुष शौचालयों का रखरखाव एक स्वयं सहायता समूह द्वारा किया जाता है, जिसमें 12 महिला सदस्य शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि यह व्यवस्था स्थानीय स्तर पर स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए की गई थी। हालांकि, कोर्ट ने इस तर्क को पर्याप्त नहीं माना और पूछा कि पुरुष शौचालयों की सफाई के लिए पुरुष कर्मचारियों की नियुक्ति क्यों नहीं की गई। कोर्ट ने ग्राम प्रधान को शपथ पत्र के माध्यम से शौचालयों के रखरखाव, कर्मचारियों की नियुक्ति और कार्य प्रणाली का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
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आदेश और भविष्य की कार्रवाई
कोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए ग्राम प्रधान को शपथ पत्र दाखिल करने का आदेश दिया, जिसमें शौचालयों के रखरखाव की पूरी जानकारी, कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया और स्वच्छ भारत मिशन के तहत लागू दिशानिर्देशों का पालन सुनिश्चित करने का विवरण शामिल हो। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि इस मामले में लैंगिक समानता और कार्यस्थल की गरिमा को ध्यान में रखते हुए सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए। इस आदेश से स्वच्छ भारत मिशन के कार्यान्वयन में स्थानीय स्तर पर मौजूद खामियों की ओर ध्यान गया है।
