melioidosis outbreak India : मेलियोइडोसिस एक जीवाणु जनित संक्रमण है, जिसका कारण बर्सोल्डेरिया स्यूडोमलाइ (Burkholderia pseudomallei) नामक बैक्टीरिया है। यह बैक्टीरिया गीली मिट्टी और गंदे पानी में पाया जाता है और बरसात,बाढ़ के समय सक्रिय हो जाता है। संक्रमण प्रायः त्वचा कटने, सांस के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है। इसके शुरूआती लक्षण सर्दी-बुखार जैसे हैं, परंतु इलाज न होने पर फेफड़े, हड्डी और मस्तिष्क भी प्रभावित हो सकते हैं। गंभीर स्थिति में सेप्सिस या ऑर्गन फेल्योर जैसी जटिलताएं पाई जाती हैं।
20 जिलों में केस आ चुके
एम्स की रिपोर्ट बताती है कि पिछले 6 सालों में प्रदेश के 20 से अधिक जिलों से 130 से ज्यादा केस सामने आ चुके हैं। यह बीमारी प्रदेश में स्थानिक (एंडेमिक) रूप ले चुकी है। एम्स के डॉक्टरों और आम जनता दोनों से अपील की है कि लंबे समय तक ठीक न होने वाले बुखार और टीबी जैसे लक्षणों को हल्के में न लें।
संक्रमित राज्यों में अलर्ट
मध्यप्रदेश के अलावा पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और उड़ीसा में भी मेलियोइडोसिस के मरीजों के मामले तेजी से दर्ज किए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने उक्त राज्यों को स्क्रीनिंग, सैंपलिंग और इलाज के लिए सतर्कता के निर्देश दिए हैं। ग्रामीण इलाकों में मिट्टी और जलस्रोतों के संपर्क में आने वालों के लिए यह खतरा और बड़ा है। किसानों, मजदूरों और बच्चों को सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है, ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों को भी संदिग्ध मरीजों की पहचान और रेफरल के प्रति जागरूक किया गया है।
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melioidosis outbreak India : बीमारी का प्रसार, लक्षण और उपचार
मेलियोइडोसिस का संक्रमण बरसात और बाढ़ के समय ज्यादा फैलता है, जब लोग कीचड़ या दूषित पानी के संपर्क में आते हैं। यह बैक्टीरिया त्वचा की दरार, घाव या श्वसन तंत्र के जरिए शरीर में प्रवेश करता है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, जोड़ों में दर्द, फोड़े, फेफड़े में संक्रमण, सांस लेने में तकलीफ, भ्रम, मांसपेशियों का दर्द, और खांसी शामिल हैं। यह संक्रमण तेजी से फैल रहा है, जिससे 40% मामलों में मरीजों की मौत का खतरा होता है, खासकर तब जब इलाज देर से और गलत होता है।
इलाज में सही समय पर पहचान और उचित एंटीबायोटिक थेरेपी अत्यंत जरूरी है, जैसे सीफ्टाजिडाइम या इमिपेनेम। संक्रमण की गंभीरता के अनुसार इलाज महीनों तक लंबा चल सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि रोग से बचाव के लिए साफ-सफाई, खुले घावों को ढंकना, दूषित पानी से बचना, और उच्च जोखिम वाले समूहों द्वारा rubber gloves या सुरक्षा उपायों का उपयोग अत्यंत जरूरी है।
रोकथाम व सावधानियां
मिट्टी या कीचड़ में काम करते समय दस्ताने पहनना
बुखार या घाव के साथ तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना
स्वच्छ पानी का ही उपयोग करें
स्वास्थ्य केंद्र द्वारा जारी एडवायजरी का पालन करें
