mayawati rally 2025 lucknow: लखनऊ में ‘बसपा मेला’ से बदलेगा यूपी?
9 साल बाद मायावती की वापसी!
mayawati rally 2025 lucknow: लखनऊ में ‘बसपा मेला’, 3 लाख की भीड़ का लक्ष्य लेकिन भतीजे आकाश नदारद?
उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है। बसपा प्रमुख मायावती 9 साल बाद शक्ति प्रदर्शन करने जा रही हैं। मौका होगा कांशीराम की पुण्यतिथि का 9 अक्टूबर को लखनऊ के कांशीराम स्मारक स्थल पर एक ऐतिहासिक रैली होगी।
- लक्ष्य: 3 लाख की भीड़
- स्थान: कांशीराम स्मारक स्थल, लखनऊ
- तारीख: 9 अक्टूबर 2025
लेकिन इस बड़ी तैयारी के बीच एक राजनीतिक संकेत भी दिखा मायावती के भतीजे आकाश आनंद और उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ इस अहम बैठक में शामिल नहीं हुए।
क्या है मायावती की रणनीति?
पंचायत चुनाव से पहले बसपा की ताकत दिखाना है, दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक वोटबैंक को फिर से गोलबंद करना. भाजपा और कांग्रेस पर सामाजिक न्याय विरोधी नीतियों का आरोप है कांशीराम स्मारक बहुजनों के आत्म-सम्मान का प्रतीक है, मायावती
हर विधानसभा से 50 बसें!
बसपा ने सभी विधानसभा क्षेत्रों को 50-50 बसें भरकर लाने का लक्ष्य दिया है। पार्टी का दावा है कि यह रैली अब तक की सबसे बड़ी होगी।
कार्यकर्ताओं का नारा
रैली नहीं, रेला होगा… बसपा का मेला होगा!
क्यों नहीं पहुंचे आकाश आनंद?

मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी माने जाने वाले आकाश आनंद इस बैठक से गायब रहे, साथ ही उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ भी अनुपस्थित हैं। अब सवाल उठ रहे हैं क्या बसपा में आंतरिक खींचतान है? क्या आकाश की भूमिका सीमित की जा रही है? पार्टी ने अनुपस्थिति की कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई है।
विपक्ष पर सीधा हमला
बैठक में मायावती ने विपक्ष पर तीखा प्रहार करते हुए कहा दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों को संवैधानिक अधिकारों से वंचित करने की साजिश चल रही है।
धार्मिक स्थलों और महापुरुषों के अपमान पर चिंता, साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप है। सरकारों को जातिवादी राजनीति से दूर रहने की नसीहत
ट्रम्प टैरिफ पर केंद्र को घेरा
मायावती ने अमेरिकी ‘ट्रम्प टैरिफ’ का जिक्र करते हुए कहा
भारत को ट्रम्प की आर्थिक साजिश से खतरा नहीं, बल्कि केंद्र की जनविरोधी नीतियों से है।
महंगाई, बेरोजगारी और गरीबी को लेकर भाजपा पर निशाना, देश का सम्मान बचाना है तो आर्थिक नीति में सुधार करें, वरना जनता जवाब देगी।

क्या बदलेगी यह रैली बसपा की किस्मत?
लखनऊ में आखिरी बड़ी रैली 2016 में हुई थी, उस रैली में भीड़ के कारण भगदड़ मच गई थी 3 की मौत। अब पार्टी 2026 के विधानसभा चुनाव और पंचायत चुनाव के लिए कमर कस रही है
9 अक्टूबर की रैली सिर्फ कांशीराम को श्रद्धांजलि नहीं होगी, बल्कि यह मायावती के नेतृत्व पर जनता का जनमत भी साबित हो सकती है। लेकिन आकाश की गैरहाजिरी और अंदरूनी सन्नाटा कई राजनीतिक सवाल जरूर छोड़ गया है…
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