
शवयात्रा के बीच होली
मणिकर्णिका घाट पर जश्न के बीच से शवयात्राएं भी गुजरती रहीं। रंग और चिता की राख में सराबोर होकर विदेशी पर्यटक भी झूमते-नाचते नजर आए। मसाने की होली का रंगोत्सव डमरू वादन से शुरू हुआ। भस्म, रंग, गुलाल और अबीर बाबा मसान नाथ को अर्पित किए गए। इसके बाद भस्म की होली शुरू हुई। मसाने की होली खेलने के लिए 3 लाख से ज्यादा श्रद्धालु और पर्यटक बनारस पहुंचे हैं। जिस चिता की राख से लोग दूरी बनाते हैं, आज उसी राख में लोग आस्था के साथ सराबोर नजर आ रहे हैं।

मणिकर्णिका घाट का रास्ता बंद
सन्यासी शरीर पर भस्म लपेटे कलाकार लगातार डमरू वादन कर रहे हैं। मणिकर्णिका घाट की गलियों में जबरदस्त भीड़ है। होली से पहले पालकी यात्रा के लिए पुलिस ने मणिकर्णिका गली खाली कराई थी। महाश्मशान मंदिर में आरती के बाद भगवान शिव की पालकी यात्रा निकाली गई। पुलिस ने मणिकर्णिका घाट की ओर जाने वाले रास्ते को बंद कर दिया। रस्सी लगाकर पुलिसकर्मी तैनात हैं। इस दौरान रास्ता रोके जाने को लेकर लोगों की पुलिसकर्मियों से कहासुनी भी हुई।
Masaan Holi Varanasi: मसान की होली
मान्यता है कि रंगभरी एकादशी के दूसरे दिन महादेव अपने गणों के साथ मणिकर्णिका घाट पर भस्मी फाग खेलते हैं। काशी में जीवन और मृत्यु को स्वीकार करने की परंपरा है, जहां देवस्थान और महाश्मशान का महात्म्य समान है। देवों के देव महादेव फाल्गुन शुक्ल द्वादशी पर यहां आते हैं। मसान की होली में काशी ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के पर्यटक भी शामिल होते है। हालांकि इस बार निर्माण कार्यों और विरोध की वजह से लोगों की भीड़कम रही लेकिन चिता भस्म की होली हुई।
