Jabalpur: मध्य प्रदेश बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन में हुई लापरवाही का मामला एक बार फिर उजागर हुआ है। 10वीं कक्षा की एक छात्रा ने मॉडल आंसर सीट के अनुसार सही उत्तर लिखने के बावजूद उसके अंक काट दिए गए। इस मुद्दे को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब तलब किया है।
सतना निवासी दिशा पांडे ने वर्ष 2024 में एमपी बोर्ड की 10वीं कक्षा की परीक्षा दी थी। परीक्षा के परिणाम में उसे 91 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए थे, लेकिन संस्कृत विषय में उसे केवल 76 अंक मिले। इस कम अंक को लेकर दिशा के पिता दिलीप पांडे ने बोर्ड से उसकी उत्तर पुस्तिका की प्रति मांगी और पुनर्गणना के लिए आवेदन किया। पुनर्गणना के बाद, छात्रा के अंक दो अंक बढ़ा दिए गए, लेकिन फिर भी उसे संतोषजनक अंक नहीं मिले।
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पुनर्मूल्यांकन का कोई प्रावधान नहीं
याचिका में दावा किया गया है कि दिशा ने पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया और बोर्ड से मॉडल आंसर सीट मांगी। जब उसने देखा कि उसके उत्तर और मॉडल आंसर एक जैसे थे, तब भी उसके अंक में कोई सुधार नहीं हुआ। इसके बाद, बोर्ड ने पुनर्मूल्यांकन करने से मना कर दिया और बताया कि पुनर्मूल्यांकन का कोई प्रावधान नहीं है।
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हाईकोर्ट में याचिका दायर
इस मामले को लेकर दिशा के पिता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका की सुनवाई करते हुए, हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव, माध्यमिक शिक्षा मंडल के सचिव, जिला शिक्षा अधिकारी सतना और शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सतना के प्राचार्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
शिक्षा प्रणाली में गंभीर लापरवाही
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विशाल बघेल ने मामले की पैरवी की और कहा कि सही उत्तर लिखने के बावजूद अंक काटे जाने की घटना शिक्षा प्रणाली में गंभीर लापरवाही को दर्शाती है। हाईकोर्ट की ओर से जारी नोटिस इस बात की पुष्टि करता है कि इस मामले की गंभीरता को समझते हुए अधिकारियों से जवाब लिया जाएगा और मामले की जांच की जाएगी।
यह मामला एमपी बोर्ड के मूल्यांकन प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता को उजागर करता है और संभावित असमानता और गलती के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम है।
