2025 wpi inflation drop food prices cheaper : मार्च 2025 में थोक महंगाई में बड़ी राहत
2025 wpi inflation drop food prices cheaper : नई दिल्ली, देश के आम नागरिकों के लिए राहत की खबर आई है। मार्च महीने में थोक महंगाई दर (Wholesale Price Index – WPI) घटकर 2.05% पर आ गई है, जो कि बीते चार महीनों का सबसे निचला स्तर है। इससे पहले नवंबर 2024 में यह दर 1.89% दर्ज की गई थी।
फरवरी में यह दर 2.38% रही थी, लेकिन रोजमर्रा की जरूरतों वाले सामान और खाने-पीने की चीजों के सस्ते होने से मार्च में महंगाई में गिरावट दर्ज की गई है।
🥦 खाने-पीने की चीजों के दाम गिरे, आम जनता को राहत
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:
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खाने-पीने की वस्तुओं की महंगाई फरवरी की 5.94% से घटकर मार्च में 4.66% पर आ गई है।
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रोजाना जरूरत की चीजों की महंगाई 2.81% से गिरकर 0.76% पर पहुंच गई।
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वहीं, फ्यूल और पावर की महंगाई दर -0.71% से बढ़कर 0.20% हो गई है।
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मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स की महंगाई 2.86% से बढ़कर 3.07% दर्ज की गई है।
📊 थोक महंगाई की संरचना: सबसे ज्यादा वेटेज मैन्युफैक्चर्ड उत्पादों का
थोक महंगाई में विभिन्न श्रेणियों की भागीदारी कुछ इस प्रकार है:
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मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स: 63.75%
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प्राइमरी आर्टिकल (खाद्य सामग्री आदि): 22.62%
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फ्यूल एंड पावर: 13.15%
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की कीमतों में बदलाव थोक महंगाई पर सबसे ज्यादा असर डालता है।
💡 WPI बनाम CPI: आम आदमी पर क्या असर?
भारत में दो प्रमुख तरीके से महंगाई को मापा जाता है:
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थोक महंगाई (WPI – Wholesale Price Index)
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खुदरा महंगाई (CPI – Consumer Price Index)
CPI उस कीमत को दर्शाता है जो ग्राहक दुकानों से सामान खरीदते समय चुकाते हैं, जबकि WPI उस कीमत को दर्शाता है जिस पर एक व्यापारी दूसरे व्यापारी से वस्तु खरीदता है।
👉 महत्वपूर्ण अंतर:
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CPI महंगाई आम आदमी के जीवन पर सीधा असर डालती है
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WPI महंगाई का असर इंडस्ट्री और उत्पादक सेक्टर पर अधिक होता है
📈 लंबे समय तक महंगाई का असर क्या होता है?
यदि थोक महंगाई दर लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती है, तो इसका बोझ कंपनियां उपभोक्ताओं पर डाल देती हैं, जिससे रोजमर्रा की चीजें महंगी हो जाती हैं।
सरकार का रोल:
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सरकार एक्साइज ड्यूटी जैसे टैक्स कम कर महंगाई को कंट्रोल करने की कोशिश करती है
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लेकिन टैक्स कटौती की एक सीमा होती है
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सरकार आमतौर पर कच्चे तेल, गैस या अन्य फ्यूल उत्पादों की कीमतों को नियंत्रित करती है
🧮 थोक महंगाई की गणना कैसे होती है?
थोक महंगाई की गणना विभिन्न प्रोडक्ट्स की कीमतों के औसत के आधार पर की जाती है। इसे तीन प्रमुख श्रेणियों में बांटा गया है:
1. प्राइमरी आर्टिकल्स (22.62%)
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फूड आर्टिकल्स: जैसे चावल, गेहूं, फल-सब्जियां
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नॉन-फूड आर्टिकल्स: जैसे ऑयल सीड
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मिनरल्स
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क्रूड पेट्रोलियम
2. फ्यूल एंड पावर (13.15%)
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पेट्रोल, डीजल, कोयला, बिजली
3. मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स (64.23%)
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मेटल्स, कैमिकल्स, प्लास्टिक, रबर
📌 खास बातें जो आपको जाननी चाहिए
✅ थोक महंगाई दर 2.05% पर पहुंची, जो कि पिछले 4 महीने में सबसे कम है
✅ खाने-पीने की चीजें और रोजमर्रा के उत्पाद सस्ते हुए
✅ इंडस्ट्री पर बोझ कम हुआ, जिससे आर्थिक गतिविधियों को बल मिल सकता है
✅ आम आदमी के बजट पर राहत मिलती दिख रही है
🚀 क्या आगे भी सस्ती होंगी चीजें?
अगर ईंधन की कीमतें स्थिर रहती हैं और फसल अच्छी होती है, तो आने वाले महीनों में भी महंगाई में गिरावट बनी रह सकती है। साथ ही अगर ग्लोबल मार्केट में मेटल्स और कच्चे तेल की कीमतें कंट्रोल में रहती हैं, तो इसका सीधा असर भारतीय महंगाई दर पर भी दिखेगा।
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