हाईकोर्ट ने पूछा—सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान कौन भरेगा?
मुंबई: मराठा आरक्षण आंदोलन के 5 दिनों तक चले प्रदर्शन ने मुंबई के आजाद मैदान को कचरे के ढेर में तब्दील कर दिया। बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने बुधवार को बताया कि 125 मीट्रिक टन कचरा निकाला गया है। 466 सफाईकर्मी पिछले 5 दिनों से लगातार काम कर रहे थे। लेकिन अब बॉम्बे हाईकोर्ट ने सवाल उठाया है—सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान कौन भरेगा?
125 टन कचरा: प्रदर्शनकारियों ने 5 दिन में जमा किया
BMC के एक अधिकारी ने बताया:
“29 अगस्त को आंदोलन के पहले दिन मैदान से 4 मीट्रिक टन कचरा निकला। 30 अगस्त को 7 मीट्रिक टन, 31 अगस्त और 1 सितंबर को 30 30 टन कचरा जमा हुआ। 2 सितंबर को सबसे ज्यादा 57 टन कचरा मिला।” प्रदर्शनकारियों ने फुटपाथों और सड़कों पर खाना बनाया, खाया, सोया, और नहाया। इससे आसपास के इलाकों में कचरे के ढेर लग गए।
हाईकोर्ट का सवाल: नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मनोज जरांगे और प्रदर्शनकारियों से पूछा:
सार्वजनिक संपत्तियों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया गया है। इसकी भरपाई कौन करेगा?
जरांगे के वकील सतीश मानेशिंदे ने आरोपों से इनकार किया और कहा कि पुरानी तस्वीरों से भ्रम फैलाया जा रहा है। कोर्ट ने 8 हफ्ते में हलफनामा दाखिल करने को कहा, जिसमें लिखा हो कि जरांगे और आयोजक किसी भी नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं हैं।
मनोज जरांगे का अनशन: हम जीत गए
मनोज जरांगे ने 29 अगस्त को आमरण अनशन शुरू किया था, जो 2 सितंबर को हाईकोर्ट के आदेश के बाद खत्म हुआ। उन्होंने कहा: “हम जीत गए हैं। सरकार ने हमारी मांगें मान ली हैं। महाराष्ट्र सरकार ने उनकी 8 में से 6 मांगें स्वीकार की हैं, जिसमें हैदराबाद गजेटियर को मंजूरी देना और मराठा कुणबी एकता शामिल है।

सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान और जिम्मेदारी
मराठा आंदोलन के बाद आजाद मैदान की सफाई तो हो गई, लेकिन सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान अभी भी बड़ा सवाल है। हाईकोर्ट ने जिम्मेदारी तय करने की बात कही है, लेकिन क्या प्रदर्शनकारी इसके लिए जवाबदेह होंगे?
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