Manipur violence pm modi visit chura chandpur: राज्य की जटिल स्थितियां क्या शांति की उम्मीद है?

manipur violence pm modi visit chura chandpur: मणिपुर, वह राज्य, जो कभी अपने सुंदर पहाड़ों और सांस्कृतिक धरोहरों के लिए जाना जाता था, आज एक नई पहचान बना रहा है—अलग-अलग जातीय समूहों के बीच लड़ी जा रही खौ़फनाक संघर्ष की वजह से। मई 2023 में शुरू हुई जातीय हिंसा ने न केवल मैतेई और कुकी समुदायों के बीच दरार डाल दी है, बल्कि पूरे राज्य को संकट में डाल दिया है। लेकिन अब, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मणिपुर दौरा, क्या इस नासमझ हिंसा को शांत कर सकता है? क्या इस दौरे से मणिपुर में शांति की एक किरण दिखेगी?
मणिपुर में हिंसा का दर्द – क्या अब भी उम्मीद बाकी है?
राज्य में जातीय संघर्ष ने हजारों लोगों की ज़िंदगियों को नष्ट कर दिया है। 260 से ज्यादा मौतें, हज़ारों लोग घर से बेघर, और पूरी राजनीतिक अस्थिरता—ये ऐसे आंकड़े हैं जिनकी गूंज हर गली, हर शहर में सुनी जाती है। मणिपुर की ये हालत जैसे कभी-कभी किसी को समझने के लिए चाहिए होता है कि इस संघर्ष ने यहाँ के लोगों को न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी घायल किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मणिपुर दौरा इस समय पर आ रहा है, जब पूरे राज्य में असंतोष और गुस्सा अपने चरम पर हैं। 13 सितंबर को मोदी जब चुराचांदपुर और इंफाल में अपनी योजनाओं का उद्घाटन करेंगे, तो क्या यह दौरा वास्तविकता में एक नया बदलाव ला पाएगा?
मोदी के दौरे से उम्मीद की लौ?
प्रधानमंत्री मोदी का मणिपुर दौरा किसी भी अन्य राजनेता से अलग हो सकता है, क्योंकि यह दौरा सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि समाज की आवाज सुनने का एक अहम कदम हो सकता है। 13 सितंबर को मोदी चुराचांदपुर में 7,300 करोड़ रुपये के एक प्रोजेक्ट की शुरुआत करेंगे और इंफाल में 1,200 करोड़ रुपये के विकास प्रोजेक्ट का उद्घाटन करेंगे। ये दोनों प्रोजेक्ट्स मणिपुर के दोनों बड़े समुदायों – मैतेई और कुकी – के हितों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।
लेकिन सवाल यह है कि क्या विकास सच में शांति का कारण बन सकता है? क्या सिर्फ आर्थिक समृद्धि मणिपुर में खोई हुई शांति और सौहार्द को वापस ला सकती है?
मणिपुर के लोग और उनके सपने
मणिपुर के लोग बहुत संवेदनशील और संघर्षशील होते हैं। यहाँ के लोग अपने संस्कृति, मूल्य और सामूहिकता में विश्वास रखते हैं। राज्य के हर गांव, हर गली में उन संघर्षों और कठिनाइयों की कहानियाँ हैं, जो यहाँ के लोग रोज़ झेलते हैं। और इसी कठिन समय में अगर प्रधानमंत्री मोदी खुद आकर समाज की समस्याएँ सुनते हैं, तो शायद यह उन्हें वह आशा दे सकता है, जो अभी कम दिखाई दे रही है।
क्या प्रधानमंत्री मोदी का यह कदम मणिपुर की घावों को भर पाएगा?
मणिपुर के सांसद लीशेम्बा सनाजाओबा का कहना है कि…
मोदी का यह दौरा मणिपुर के लिए सौभाग्य की बात है।
उन्होंने कहा,
“ऐसा पहली बार हो रहा है कि कोई प्रधानमंत्री राज्य में शांति लाने के लिए गंभीर रूप से कदम उठा रहा है।”
राज्य के विभिन्न हिस्सों में बढ़ती हिंसा और अस्थिरता के बीच यह दौरा जैसे मणिपुर की मदद के लिए एक अंतिम उम्मीद बन सकता है। कांगला किला और पीस ग्राउंड जैसे ऐतिहासिक स्थानों पर होने वाले कार्यक्रमों से शांति का संदेश दिया जा सकता है।
शांति की दिशा में एक कदम?
प्रधानमंत्री मोदी का मणिपुर दौरा..
राज्य के लिए एक ऐतिहासिक कदम हो सकता है। हिंसा से थके हुए इस राज्य में अगर सरकार और जनता दोनों मिलकर एक नई दिशा में कदम बढ़ाते हैं, तो शायद एक दिन मणिपुर फिर से शांति का गहना पहन सके।
लेकिन….
यह दौरा एक शुरुआत है, न कि अंत। राज्य की स्थायी शांति तब ही संभव होगी, जब हर वर्ग, हर समुदाय को विश्वास दिलाया जाए कि वे समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।
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