शिव अभिषेक में गंगाजल का महत्व
How to make Ganga Jal at home: सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इस दौरान शिवभक्त गंगाजल से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करना चाहते हैं। लेकिन गांवों,कस्बों या दूरदराज के क्षेत्रों में कई बार गंगाजल उपलब्ध नहीं हो पाता जिससे भक्तों को निराशा होती है।
धर्मग्रंथों में बताया गया है उपाय
ऐसे समय में धर्मशास्त्रों में एक सरल लेकिन प्रभावशाली उपाय बताया गया है। एक मंत्र के जरिए सामान्य जल को भी उतना ही पवित्र माना जा सकता है जितना कि गंगाजल। यह मंत्र सप्तनदियों का आह्वान करता है और जल को पवित्र बनाता है।
यह है वह चमत्कारी मंत्र
गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति।
नर्मदे सिंधु कावेरी जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥
इस मंत्र का अर्थ है… हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिंधु और कावेरी, आप सभी इस जल में निवास कीजिए। इस मंत्र को तीन बार उच्चारित कर जल पर संकल्प लेने से वह जल भी गंगाजल के समान पवित्र हो जाता है।
श्रद्धा और भावना ही पूजा का आधार
How to make Ganga Jal at home: शास्त्रों के अनुसार… पूजा में सबसे अधिक महत्व श्रद्धा और भावना का होता है। यदि गंगाजल उपलब्ध न हो तो भक्त निराश न हों। उपरोक्त मंत्र का जाप कर जल को पवित्र कर भगवान शिव का जलाभिषेक करें। यही सच्ची भक्ति है जो शिव को सबसे प्रिय होती है।
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