
मुफ्त राशन या ₹100 का पैकेज?
महोबा के नारूपुरा इलाके की दो सरकारी राशन की दुकानों पर यह अनैतिक खेल बेरोकटोक चल रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कोटेदारों ने मुफ्त राशन को ₹100 के अनिवार्य पैकेज से जोड़ दिया है। शेखूनगर की मालतीबाई बताती हैं कि उन्हें राशन लेने के लिए पहले ₹100 का सामान खरीदना पड़ा। रामकली की कहानी भी अलग नहीं है। उन्होंने बताया कि कोटेदार ने साफ कहा, “पैकेट लो, तभी राशन मिलेगा।” यह स्थिति गरीबों के लिए राहत की जगह बोझ बन रही है, क्योंकि उनके पास न तो अतिरिक्त पैसे हैं और न ही इन वस्तुओं की जरूरत।

Mahoba free ration scam: राशन कटौती की धमकी
नयापुरा नैकाना की मीनू सोनी का मामला और भी गंभीर है। उन्होंने ₹100 देने से इनकार किया तो कोटेदार ने उनके हिस्से का राशन काट दिया। मीनू को तय अनाज से 2 किलो और चावल से 3 किलो कम दिया गया। यह केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि सैकड़ों गरीबों की मजबूरी का सच है। कोटेदारों की मनमानी ने सरकार की मुफ्त राशन योजना को मजाक बना दिया है। गरीबों को राहत देने की जगह, यह योजना उनकी जेब पर डाका डाल रही है।

प्रशासन का रवैया: जांच का वादा
जब इस मामले में पूर्ति निरीक्षक प्रवीण कुमार वर्मा से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने शासनादेश का हवाला दिया। उनके मुताबिक, कोटेदारों को 35 प्रकार की वस्तुएं बेचने की अनुमति है, लेकिन यह खरीद पूरी तरह स्वैच्छिक होनी चाहिए। जबरन सामान खरीदने की शिकायत पर उन्होंने जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह आश्वासन जमीनी स्तर पर लागू होगा? स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी शिकायतें पहले भी की गईं, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

गरीबों की मजबूरी, कोटेदारों की कमाई
महोबा में यह स्थिति सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करती है। मुफ्त राशन योजना का उद्देश्य गरीबों को भुखमरी से बचाना था, लेकिन कोटेदारों की लूट ने इसे व्यापार का जरिया बना दिया। गरीब परिवार, जो दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, उनके लिए ₹100 का अतिरिक्त खर्च बड़ा बोझ है। यह योजना, जो कागजों पर मुफ्त है, जमीनी स्तर पर गरीबों की जेब हल्की कर रही है।
