महाशिवरात्रि का पावन पर्व: रुद्राभिषेक का महत्व और उसकी विधि
Rudrabhishek on Mahashivratri: महाशिवरात्रि पर किन वस्तुओं से करना चाहिये भगवान शिव का रुद्राभिषेक जिनसे मिल सकता है जीवन मे सुख, सुविधाएं और बेहतर स्वास्थ्य का आशीर्वाद. महाशिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित एक ऐसा दिन जब डामरुओं की नाद और हर हर महादेव के नारों से सारा ब्रह्माण्ड गूंज उठेगा, जब 12 दिशाओं मे सिर्फ शिव ही शिव दिखेंगे, जब सभी देवी देवता और मनुष्य भोलेनाथ की भक्ति मे लीन होंगे.
भगवान शिव को प्रसन्न करने का सबसे प्रभावशाली उपाय(Rudrabhishek on Mahashivratri)
सनातन धर्म मे महाशिवरात्रि भगवान शिव की पूजा के लिये सबसे बड़ा पर्व है क्योंकि पुराणों के अनुसार इसी दिन भगवान शिव पहली बार शिवलिंग के रूप मे प्रकट हुऐ थे और इसी शुभ दिन शिव – पार्वती का विवाह भी हुआ था. शास्त्रों मे वर्णित है की महाशिवरात्रि पर रुद्राभिषेक करने से शिव प्रसन होते हैं बल्कि सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य जीवन का आशीर्वाद भी प्रदान करते हैं और अपने भक्तों के सारे कष्ट हर लेते हैं.
महाशिवरात्रि पर रुद्राभिषेक करने से मिलता है सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य
हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि मनाई जाती है. इस दिन मे महारुद्राभिषेक एवं शिव पंचाक्षरी मंत्र जाप अत्यंत प्रभावशाली और दिव्य फलदायी माना जाता है. रुद्राभिषेक, भगवान शिव को प्रसन्न करने का सबसे प्रभावशाली अनुष्ठान है, जिसमें विभिन्न पवित्र द्रव्यों से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। इनमें सभी द्रव्यों का अपना अलग महत्व होता है।
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पंचाक्षरी मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का जप क्यों है महत्वपूर्ण?
Rudrabhishek on Mahashivratri: वहीं, बात करें… पंचाक्षरी मंत्र जाप…की तो सनातन धर्म में मंत्र जाप की महीमा प्राचीन काल से चली आ रही है।
मंत्र जाप में इतनी शक्ति होती है कि कई असाध्य काम भी मंत्र जाप करने से सधने लगते हैं। कहते हैं कि शिव के पंचाक्षर मंत्र, “ॐ नमः शिवाय”, हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र मंत्र है। इस मंत्र का जाप करने से व्यक्ति को जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता की प्राप्ति होती है। वहीं, अगर यह पूजा ज्योतिर्लिंग में की जाए तो यह और भी ज्यादा प्रभावशाली मानी जाती है। शिव पुराण के अनुसार आइए, जानते हैं उन 21 पवित्र द्रव्यों का महत्व –
1. जल– जल शुद्धता और भक्ति का प्रतीक है। यह शिवजी के उग्र रूप को शांत कर नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।
2. दूध– दूध पवित्रता और पोषण का प्रतीक है। यह भगवान शिव को शीतलता प्रदान करता है और दीर्घायु तथा समृद्धि का आशीर्वाद देता है।
3. शहद– मधु यानी शहद जीवन में माधुर्य और सौहार्द्र को दर्शाता है। इसे अर्पित करने से वाणी में प्रभावशीलता आती है और दिव्य कृपा प्राप्त होती है।
4. घी– घी पवित्रता, ज्ञान और आध्यात्मिक वृद्धि का प्रतीक है। यह समस्त विघ्नों को दूर कर आत्मिक शुद्धि प्रदान करता है।
5. दही – दही प्रजनन शक्ति, समृद्धि और शीतलता का प्रतीक है। इसे अर्पित करने से संतान प्राप्ति एवं जीवन में स्थिरता मिलती है।
6. गन्ने का रस – यह जीवन में… मिठास, शुभता और नकारात्मकता को समाप्त करने का प्रतीक है। इससे संबंधों में प्रेम और सामंजस्य बना रहता है।
7. नारियल पानी– नारियल जल सरलता और शुद्धता का प्रतीक है। इसे चढ़ाने से मन शांत रहता है और भगवान शिव का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त होता है।
8. चंदन – चंदन शीतलता, शांति और आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक है। यह मन को शांत कर शिव-तत्व से जोड़ता है।
9. गुलाब जल – यह प्रेम और भक्ति का प्रतीक है। यह नकारात्मकता दूर कर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और दिव्यता का संचार करता है।
10. गंगाजल – गंगाजल सर्वाधिक पवित्र और शुभ माना जाता है। यह आत्मा का शुद्धिकरण करता है और समस्त पापों से मुक्ति दिलाता है।
11. गाय का दूध– यह पोषण, पवित्रता और सात्विकता का प्रतीक है। इसे अर्पित करने से स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
12. शक्कर – शक्कर (चीनी) दिव्य अमृत के समान होती है। इसे अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और जीवन में ऊर्जा और सकारात्मकता बढ़ती है।
13. भस्म– भस्म, संसार की नश्वरता और मोक्ष का प्रतीक है। इसे अर्पित करने से आत्मिक बल प्राप्तहोता है और अहंकार का नाश होता है।
14. सरसों का तेल – यह बुरी शक्तियों और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने का प्रतीक है। इसे अर्पित करने से सुरक्षा और कल्याण प्राप्त होता है।
15. नींबू रस – यह शुद्धिकरण व बाधाओं को समाप्त करने का प्रतीक है। इसे अर्पित करने से जीवन में शांति और समृद्धि आती है।
16. हल्दी का जल – हल्दी को स्वास्थ्य, शुभता और रोग निवारण का प्रतीक माना गया है। यह भगवान शिव से आरोग्य और दीर्घायु का आशीर्वाद दिलाता है।
17. बिल्व पत्र – भगवान शिव का प्रिय बेल पत्र, उसके तीन पत्तों को तमस, रजस और सत्व का प्रतीक माना गया है। ये तीनों गुणों का संतुलन बनाए रखता है और शिव कृपा दिलाता है।
18. गेहूं – मान्यता है कि यह समृद्धि और भोजन की अखंडता का प्रतीक है। इसे अर्पित करने से अन्न-धन की वृद्धि होती है।
19. पुष्प– मान्यता है कि पूजा के दौरान विभिन्न प्रकार के फूल भगवान शिव को प्रसन्न करने और मन की पवित्रता दर्शाने के लिए अर्पित किए जाते हैं।
20. अक्षत – अक्षत यानी चावल जो पवित्रता, समृद्धि और स्थिरता का प्रतीक है। मान्यता है कि इसे अर्पित करने से धन, ऐश्वर्य और सफलता प्राप्त होती है।
21. फल (जैसे केला, सेब, अन्य मौसमी फल) – फल श्रद्धा और इच्छाओं की पूर्ति का प्रतीक है। मान्यता है कि भगवान को फल अर्पित करने से जीवन में सौभाग्य और प्रसन्नता आती है।
इन सभी वास्तुओं से रुद्राभिषेक से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है और समस्त इच्छाएँ पूर्ण होती हैं। हर हर महादेव हर घर महादेव II
