कोलकाता में 39 साल बाद हुई रिकॉर्ड बारिश
maharashtra bengal floods record: भारत के महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में इन दिनों भारी बारिश और बाढ़ के कारण तबाही मच गई है। जहां महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में बाढ़ से 8 लोगों की मौत हो गई, वहीं बंगाल के कोलकाता में 10 लोगों की जान गई। भारी बारिश और बाढ़ के कारण दोनों राज्य की सामान्य जिंदगी पूरी तरह से प्रभावित हो गई है।

महाराष्ट्र में बाढ़ की गंभीर स्थिति
महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में पिछले चार दिनों से हो रही मूसलधार बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। लातूर, बीड, छत्रपति संभाजीनगर, नांदेड़ और धाराशिव जिलों में बाढ़ का प्रभाव सबसे ज्यादा देखने को मिला। यहां बिजली गिरने, डूबने और अन्य कारणों से कुल 8 मौतें हुईं।
अधिकारी के मुताबिक, मराठवाड़ा के आठ जिलों में 766 घरों को बाढ़ से नुकसान हुआ है। इसके साथ ही 33,010 हेक्टेयर से ज्यादा कृषि भूमि बर्बाद हो गई है, और बीड तथा धाराशिव में पांच बांधों के अलावा कई सड़कें, पुल और स्कूल भी नष्ट हो गए हैं।
राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने NDRF और SDRF की 17 टीमों को राहत कार्यों में तैनात किया है। इसके अलावा, प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए 2,215 करोड़ रुपये के ऑर्डर जारी किए गए हैं। फडणवीस ने यह भी कहा कि किसानों को 10 दिनों के भीतर मुआवजा राशि उनके खातों में भेज दी जाएगी।
कोलकाता में रिकॉर्ड बारिश और तबाही
वहीं, पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता भी इन दिनों भारी बारिश की चपेट में है। 39 साल बाद कोलकाता में एक दिन में इतनी अधिक बारिश हुई है। सोमवार रात से लेकर मंगलवार सुबह तक 251.4 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई, जो 1986 के बाद सबसे अधिक है। बारिश के कारण शहर के कई इलाकों में 2 से 3 फीट तक पानी भर गया, जिससे सड़कों पर यातायात ठप हो गया।
कोलकाता में लगातार दूसरे दिन भी जलभराव की स्थिति बनी रही। इस भारी बारिश ने 10 लोगों की जान ले ली, जिनमें से 9 की मौत करंट लगने से हुई। कई इलाकों में बिजली गिरने से भी नुकसान हुआ। इसके अलावा, दुर्गा पूजा पंडालों और मूर्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। स्कूल-कॉलेजों में 25 सितंबर तक छुट्टियां घोषित कर दी गई हैं।
कोलकाता एयरपोर्ट पर 30 से ज्यादा फ्लाइट्स और कई ट्रेनें भी रद्द कर दी गईं। यहां तक कि कई स्थानों पर कारों को क्रेन से निकाला गया।
राहत कार्य और भविष्य की चेतावनी
महाराष्ट्र और बंगाल दोनों राज्यों में राहत कार्य युद्धस्तर पर चल रहे हैं। NDRF और SDRF की टीमें प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए काम कर रही हैं। वहीं, मौसम विभाग ने छत्तीसगढ़ और हिमाचल प्रदेश सहित कई अन्य राज्यों में भी भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के इस समय में तेज बारिश और बाढ़ की घटनाएं बढ़ने की संभावना है, जिससे और भी तबाही हो सकती है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि सभी प्रभावित राज्यों में तत्काल राहत कार्य जारी रहें और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जाए।
क्या हम प्राकृतिक आपदाओं से जूझने के लिए तैयार हैं?
देशभर में लगातार बढ़ रही बाढ़ और बारिश की घटनाएं एक महत्वपूर्ण सवाल उठाती हैं: क्या हम प्राकृतिक आपदाओं से जूझने के लिए तैयार हैं? क्या हमारे पास ऐसी आपदाओं के प्रभावों को नियंत्रित करने की रणनीतियां हैं? क्या हम भविष्य में और ज्यादा विनाश से बचने के लिए कारगर कदम उठा रहे हैं?
यह स्थिति हमें यह सिखाती है कि प्राकृतिक आपदाओं का प्रभाव हमारी तैयारियों पर निर्भर करता है। राहत कार्यों की गति, प्रशासन की तत्परता और लोगों को जागरूक करने के प्रयास हमारी स्थायी सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।

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