Mahalaxmi Temple: इंदौर के राजवाड़ा क्षेत्र में स्थित प्राचीन महालक्ष्मी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यह मंदिर 1831 में होलकर शासक हरिराव होलकर द्वारा बनवाया गया था और देवी महालक्ष्मी की दिव्य प्रतिमा व ऐतिहासिक महत्व के कारण प्रसिद्ध है। दीपावली के अवसर पर यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जिसके चलते मंदिर समिति ने विशेष सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था की है।

समिति ने विशेष सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था की
दीपावली पर मंदिर को आकर्षक फूलों, रोशनी और आभूषणों से सजाया जाता है। महालक्ष्मी की प्रतिमा को इस दिन तीन बार—सुबह 7 बजे, दोपहर 12 बजे और शाम 5 बजे—नई पोशाक पहनाई जाती है। ग्यारस से दीपावली तक प्रतिदिन माता का विशेष श्रृंगार किया जाता है। पुजारी भानु प्रकाश दुबे बताते हैं कि यह मंदिर खासतौर पर राजपरिवार के सदस्यों की सुविधा को ध्यान में रखकर राजवाड़ा के पास बनवाया गया था। माता की प्रतिमा करीब दो फीट ऊंची है और पिछले 55 वर्षों से यहां चमत्कारी अनुभवों की कई कथाएं जुड़ी हुई हैं।
Mahalaxmi Temple: 55 वर्षों से यहां चमत्कारी अनुभवों की कई कथाएं जुड़ी हुई
एक अनूठी परंपरा के अनुसार, भक्त अपने सपनों का घर या कोई भी मनोकामना जैसे बाइक, संतान या विवाह के लिए प्रतीकात्मक मॉडल माताजी को अर्पित करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से उनकी इच्छाएं शीघ्र पूरी होती हैं। मंदिर में कई ऐसी प्रतिकृतियां रखी गई हैं, जो भक्तों की पूर्ण हुई मनोकामनाओं की गवाही देती हैं।
निकास की व्यवस्था दर्शन को सुगम बनाती है
दीपावली के दिन मंदिर में 40 से 50 हजार श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। दर्शन के लिए बैरिकेड्स और रेलिंग की व्यवस्था की गई है, जिससे प्रत्येक भक्त को 5 से 7 मिनट के भीतर माताजी के दर्शन का अवसर मिलता है। एक ओर से प्रवेश और दूसरी ओर से निकास की व्यवस्था दर्शन को सुगम बनाती है।
5 से 10 भक्त इस सुविधा का लाभ उठाते हैं
Mahalaxmi Temple: मंदिर में वीडियो कॉल की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे देश-विदेश में रह रहे परिवारजन भी दर्शन कर सकते हैं। कई भक्त अपने परिजनों को वीडियो कॉल के माध्यम से माताजी के दर्शन कराते हैं, जो अब मंदिर में आम दृश्य बन चुका है। रोजाना लगभग 5 से 10 भक्त इस सुविधा का लाभ उठाते हैं।
इस प्रकार, महालक्ष्मी मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि आधुनिक तकनीक और व्यवस्थाओं के साथ भक्तों की भावनाओं को भी पूर्ण सम्मान देता है।
