उज्जैन में धार्मिक परंपराओं का नया अध्याय
Mahakal Shahi sawari : मध्यप्रदेश के उज्जैन में आज 2 सितम्बर 2024 को बाबा महाकाल की शाही सवारी निकाली जा रही है, ये इक साल की अंतिम सवारी है। जो हर वर्ष महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के भक्तों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम है,

बाबा महाकाल की ये सवारी अब एक नई पहचान पाने जा रही है। राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हाल ही में इस ऐतिहासिक सवारी के नाम को बदलने की घोषणा की है।
विक्रमादित्याकालीन है महाकाल की सवारी
महाकाल की शाही सवारी का आयोजन उज्जैन में हर साल सावन भाद्रपद मास में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की पूजा-अर्चना के अवसर पर बड़े धूमधाम से किया जाता है। इसमें शामिल होने के लिए देश विदेश से लाखों भक्त उज्जैन पहुंचते हैं।

यह सवारी श्रद्धालुओं के लिए एक अद्भुत अनुभव होती है, जिसमें भगवान महाकाल की भव्य रथ यात्रा के माध्यम से उनकी दिव्यता का अनुभव होता है। यह परंपरा सदियों पुरानी है और उज्जैन की धार्मिक संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है।
बाबा की सावरी का नाम परिवर्तन का कारण
सीएम मोहन यादव ने सवारी के नाम परिवर्तन के बारे में बताते हुए कहा कि यह निर्णय “धार्मिक सम्मान और परंपराओं की पुनर्स्थापना” के उद्देश्य से लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि नए नाम से इस परंपरा को और अधिक मान्यता और श्रद्धा प्राप्त होगी। नया नाम न केवल धार्मिक भावनाओं को और प्रगाढ़ करेगा बल्कि स्थानीय संस्कृति और इतिहास के प्रति सम्मान भी बढ़ाएगा।
शाही के स्थान पर राजसी सवारी बनेगी नई पहचान
शाही के स्थान पर राजसी सवारी का नाम बदलने के पीछे स्थानीय जनता और श्रद्धालुओं में उत्सुकता बनी हुई है। मुख्यमंत्री ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इस परिवर्तन के साथ ही सवारी की शाही और भव्यता को पूरी तरह बनाए रखा जाएगा।
राजसी सवारी के भविष्य की दिशा
राजसी के नए नाम के साथ, महाकाल की शाही सवारी का यह नया युग न केवल धार्मिक क्षेत्र में एक नई शुरुआत करेगा बल्कि इससे पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा। यह निर्णय महाकालेश्वर मंदिर प्रबंधन और स्थानीय अधिकारियों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद लिया गया है।

इस ऐतिहासिक कदम से यह अपेक्षा की जा रही है कि महाकाल की शाही सवारी की आभा और गरिमा में और भी इजाफा होगा। जैसे-जैसे यह परंपरा एक नई पहचान प्राप्त करेगी, उज्जैन के धार्मिक और सांस्कृतिक परिदृश्य में एक नई ऊर्जा और उल्लास देखने को मिलेगा।
उम्मीद है कि इस बदलाव से भक्तों की श्रद्धा और स्थानीय लोगों की गर्व भावना को नई ऊँचाइयाँ प्राप्त होंगी, और बाबा महाकाल की शाही सवारी अपने नए नाम के साथ नए कीर्तिमान स्थापित करेगी।
Mahakal Shahi sawari name change Ujjain
