mahakal sehra shringar: महाशिवरात्रि के अगले दिन सोमवार को महाकालेश्वर मंदिर में आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। आज तड़के होने वाली भस्म आरती नहीं हुई, बल्कि भगवान बाबा महाकाल को साल में एक बार धारण किया जाने वाला सवा मन वजनी और करीब 11 फीट ऊंचा पुष्प सेहरा पहनाया गया। सेहरे में सजे बाबा महाकाल दूल्हे के स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते नजर आए, जिसे देखने के लिए मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।

mahakal sehra shringar: चार प्रहर की पूजा के बाद सजा सेहरा
महाशिवरात्रि की रात 11 बजे से सोमवार सुबह तक चार प्रहर की महाअभिषेक पूजा संपन्न हुई। इसके बाद भगवान महाकाल को नवीन वस्त्र धारण कराए गए और सप्तधान्य से मुखमंडल का शृंगार किया गया। शृंगार में 31 किलो चावल के साथ 11-11 किलो मूंग, तिल, मसूर, जौ, गेहूं, साल और उड़द अर्पित किए गए। यह दृश्य भक्तों के लिए खास रहा, कई लोग देर तक निहारते रहे।
mahakal sehra shringar: फूलों से सजा 11 फीट का सेहरा
सुबह 6 बजे सेहरा आरती हुई। बाबा को अलग-अलग किस्म के फूलों की लड़ियां, आक के फूल और मोटी मालाएं अर्पित की गईं। स्वर्ण-रजत आभूषण, छत्र, चंद्र मुकुट और त्रिपुंड से भगवान महाकाल का शृंगार और भी दिव्य नजर आया। मंदिर समिति की ओर से चांदी का सिक्का और चांदी का बिल्वपत्र भी अर्पित किया गया। आज देर रात, करीब 44 घंटे बाद मंदिर के पट बंद किए जाएंगे।
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सेहरे के प्रसाद की अनोखी परंपरा
महाकाल मंदिर के पंडित महेश पुजारी ने बताया कि सेहरा उतारने के बाद उसके प्रसाद को लेने के लिए भक्तों में खास उत्सुकता रहती है। इसे आम बोलचाल में ‘सेहरा लूटने’ की परंपरा कहा जाता है। मान्यता है कि सेहरे के धान को घर में रखने से मां अन्नपूर्णा का आशीर्वाद बना रहता है और घर में सुख-समृद्धि आती है। वहीं फूलों को लोग तिजोरी में रखते हैं, जबकि फल प्रसादी के रूप में ले जाए जाते हैं।
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आज दोपहर होगी विशेष भस्म आरती
आमतौर पर बाबा महाकाल की भस्म आरती सुबह 4 बजे होती है, लेकिन साल में एक बार सेहरा उतारे जाने के बाद दोपहर 12 बजे भस्म आरती होती है। इस बार दोपहर की भस्म आरती में सामान्य श्रद्धालुओं को भी दर्शन का अवसर मिलेगा। भक्त कार्तिकेय मंडपम से निरंतर चलते हुए दर्शन कर सकेंगे। मंदिर प्रशासन का दावा है कि 40 से 45 मिनट में दर्शन कराए जाएंगे। भस्म आरती के बाद दोपहर 2:30 से 3 बजे तक भोग आरती होगी। शाम 5 से 5:45 बजे संध्या पूजन, 6:30 से 7:15 बजे संध्या आरती और रात 10:30 बजे शयन आरती के बाद 11 बजे मंदिर के पट बंद कर दिए जाएंगे।
