अयोध्या से रामलला तक आया त्योहार का रंग!
जब सावन का आखिरी दिन आता है, तो पूरे देश में एक खास जादू छा जाता है। प्यार, अपनापन और रक्षा के त्योहार रक्षाबंधन पर हर दिल एक साथ धड़कता है। इस बार 2025 में ये त्योहार अपने आप में कुछ और भी खास बन गया — क्योंकि महाकाल और बाबा विश्वनाथ जैसे सबसे पावन मंदिरों में भी राखी बांधी गई।

काशी में बाबा विश्वनाथ को रेशमी राखी की सौगात
काशी की मंगला आरती के बाद, बाबा विश्वनाथ को रेशम की राखी पहनाई गई। यह एक ऐसा दृश्य था, जहां भक्तों की श्रद्धा और त्योहार की खुशबू दोनों साथ-साथ महसूस हुईं। यह राखी न सिर्फ धागे का बंधन थी, बल्कि एक गहरी भक्ति का प्रतीक थी।
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में अमर पुजारी को राखी
महाकालेश्वर मंदिर में इस बार राखी बांधने की खास परंपरा अमर पुजारी के परिवार की महिलाओं ने निभाई। मखमल के कपड़े, रेशमी धागा और मोतियों से सजी राखी पर भगवान गणेश की आकृति भी अंकित थी — जैसे हर बंधन में मंगलकामना हो।
अयोध्या में रामलला के लिए भी राखी आई
देश के एक और पवित्र स्थल अयोध्या से रामलला और उनके भाइयों के लिए भी राखियां आईं। श्रृंगी धाम से लाई गई ये राखियां यह याद दिलाती हैं कि भाई-बहन का रिश्ता किसी धर्म या जाति का मोहताज नहीं होता।

देश के कई हिस्सों में नेताओं और जवानों को राखी
इस खास दिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। साथ ही गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, गोवा के सीएम प्रमोद सावंत और उत्तराखंड के सीएम ने भी राखी बांधी। गुजरात में महिला कलाकारों ने सीएम को राखी बांधी, तो गोवा में स्कूली छात्राओं ने सीएम को रक्षासूत्र से बांधा। यह तस्वीरें बताती हैं कि राखी का त्योहार हर वर्ग और क्षेत्र में प्रेम और सुरक्षा का संदेश फैलाता है।
राखी बांधने के शुभ मुहूर्त और महत्व
इस साल रक्षाबंधन पर खास बात ये रही कि पूरे दिन भद्रा का साया नहीं था। यानी इस बार राखी बांधने में कोई बाधा नहीं। इस दिन के तीन शुभ मुहूर्त हैं, जिनमें भाई-बहन राखी बांधकर एक-दूसरे के लिए खुशहाली, स्वास्थ्य और सुरक्षा की कामना करते हैं।
राखी का मतलब सिर्फ धागा नहीं, बल्कि रिश्ता है
राखी जो बांधी जाती है, वो सिर्फ एक रंगीन धागा नहीं होता, बल्कि दिलों के बंधन की मिसाल है। जब बाबा विश्वनाथ, महाकाल, रामलला और देश के नेताओं तक राखी के इस प्यार भरे संदेश को साझा करते हैं, तो लगता है कि हमारे देश की आत्मा में कितनी गहरी एकता और अपनापन है।

इस रक्षाबंधन पर, चलिए हम सब अपने रिश्तों को और मजबूत करें, न केवल परिवार में बल्कि अपने समाज, अपने देश और अपने भीतर के उस इंसान के साथ भी, जो हमें अपनेपन की सबसे ज्यादा ज़रूरत देता है।
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