
उज्जैन, नासिक, काशी से लेकर कुंभ तक हर हर महादेव
Maha Shivratri 2025: महाशिवरात्रि को लेकर देशभर के शिव मंदिरों में लोगों का तांता लगा हुआ है, काशी विश्वनाथ, प्रयागराग, अयोध्या, नासिक, देवघर से लेकर उज्जैन तक मंदिरों में भक्त बम-बम भोले के जयकारे लगा रहे हैं. आधी रात से ही भोलेनाथ की भक्ति में श्रद्धालु डूबे हुए हैं.
उज्जैन में बाबा महाकाल बने दूल्हा

महाशिवरात्रि पर्व पर बुधवार रात 2:30 बजे महाकालेश्वर मंदिर के पट खुले. महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने बाबा का पंचामृत अभिषेक किया. इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीत गिरी जी महाराज ने भगवान महाकाल को भस्मी अर्पित की. इसके बाद बाबा को राजा और दूल्हे की तरह तैयार किया गया. जिसके बाद बाबा महाकाल की आरती हुई, जिसे देख श्रद्धालु बाबा की भक्ति में लीन हो गए.
लगातार 44 घंटे खुला रहेगा मंदिर
9 दिनों तक भगवान महाकाल अपने भक्तों को अलग-अलग स्वरूपों में दर्शन दिए. आज महाशिवरात्री के मौके पर भगवान महाकाल राजा के रूप में दिनभर भक्तों को दर्शन देंगे. रात 12:00 बजे बाबा को दूल्हे की तरह सहरा पहनाया जाएगा और गुरुवार को दिन में एक बार फिर भस्म आरती होगी. 44 घंटे तक भगवान महाकाल के दर्शन के लिए मंदिर खुला रहेगा.
देश के इन मंदिरों में खास महोत्सव

वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर में महाशिवरात्रि पर मंगला आरती हुई है और भक्तों के लिए कपाट खोले गए हैं.
दिल्ली के चांदनी चौक में गौरी शंकर मंदिर में भक्तों की लंबी कतारें लगी हुई हैं और श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर रहे हैं.
कोलकाता में महाशिवरात्रि से एक दिन पहले से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी थी. भूतनाथ मंदिर मे दर्शन के लिए लोग पहुंचे.
भुवनेश्वर के लिंगराज मंदिर में जश्न का माहौल है. श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर रहे हैं.
नासिक के त्र्यंबकेश्वर मंदिर में भक्तों की भीड़ है. हर हर महादेव के जयघोष लगाकर बाबा के दर्शन कर रहे हैं.
काठमांडु के पशुपतिनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ है. भारतीय सेना के 6 पूर्व प्रमुखों ने पूजा की.
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महाशिवरात्रि का क्या है महत्व?
महाशिवरात्रि पर व्रत, उपवास, मंत्र जाप और रात्रि जागरण का महत्व है.
ये फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को मनाई जाती है.
इस दिन तत्काल प्रसन्न होने वाले भगवान शिव के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है.
भगवान के जलाभिषेक,
पंचामृत अभिषेक का विधान है.
साथ ही साथ धतूरा,
बिल्वपत्र,
रुद्राक्ष,
भस्म,
गंगाजल,
फल-फूल से पूजा की जाती है.
भोलेनाथ की उपासना से संपूर्ण सुख की प्राप्ति होती है.
महाशिवरात्रि कैसे होंगे महादेव प्रसन्न?
स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
भगवान शिव को जलाभिषेक करें.
दूध, घी, दही, शहद, जल से अभिषेक.
सिर्फ जलाभिषेक से भी प्रसन्न होते हैं महादेव.
धतूरे के फल और भांग चढ़ाने की भी परंपरा.
शिव महापुराण में बिल्वपत्र अर्पण का विधान.
पवित्र शिवलिंग का चंदन से तिलक करें.
ऊं नमः शिवाय या किसी मंत्र का जाप करें.
