महाकुंभ को भारत मे सबसे बड़े सांस्कृतिक और धार्मिक उत्सव के रूप मे मनाया जा रहा है लेकिन इसका महत्व सिर्फ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक नहीं है इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हो रहा महाकुंभ न केवल श्रद्धालुओं के लिए एक अद्भुत और अद्वितीय अनुभव है, बल्कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी इससे 25 हजार करोड़ रुपये की आय होने की संभावना हैl
इस आयोजन से न सिर्फ स्थानीय काम करने वाले छोटे कारोबारियों को फायदा होगा, बल्कि कुल मिलाकर इससे लाखों लोगों को रोजगार मिलेगाl महाकुंभ मेले का शुभारंभ पौष पूर्णिमा के दिन 13 जनवरी 2025 को होगा और यह अद्भुत पर्व 26 फरवरी 2025 को महाशिवरात्रि के साथ संपूर्ण होगा l
महाकुंभ 2025 का अर्थ
उत्तर प्रदेश सरकार महाकुंभ 2025 को एक धार्मिक आयोजन के साथ ही साथ एक बड़े आर्थिक अवसर के
तौर पर भी देख रही है l इस आयोजन का बजट 6,382 करोड़ रुपये है, जिसमें से 5,600 करोड़ रुपये
इवेंट मैनेजमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए आवंटित किए गए हैं l 2019 में हुए कुंभ मेले की तुलना
में यह खर्च लगभग दोगुना है लेकिन इस खर्च की तुलना में इससे होने वाला लाभ भी कई गुना अधिक
है. अनुमान है कि यह विशाल पर्व राज्य के लिए 25 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय एकत्रित
करेगा.
महाकुंभ 2025 में अनुमानों के मुताबिक करीब 40-45 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना व्यक्त की
जा रही है l इतने बड़े आयोजन से तमाम छोटे-बड़े स्थानीय व्यवसायों को काफी लाभ होगा, इनमें टैक्सी,
ऑटो, नावचालक और रिक्शे चलाने वालों से लेकर फूल बेचने वाले, घाटों व मंदिरों के पास छोटी-मोटी
दुकानें लगाने वाले और होटलों के मालिक तक बहुत बड़ा वर्ग शामिल है l उत्तर प्रदेश के पर्यटन विभाग के
अनुसार महाकुंभ की तैयारियों के दौरान हुए कामकाज से ही कम से कम 45,000 परिवारों को रोजगार
मिला है. इसके अलावा, नाव चलाने वालों, टूरिस्ट गाइड्स, स्ट्रीट वेंडर्स और ड्राइवरों समेत तमाम सर्विस
प्रोवाइडर्स को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है, ताकि वे यात्रियों को बेहतर सेवाएं मुहैया करा सकें. कुंभ
मेले का आर्थिक असर सिर्फ प्रयागराज तक सीमित नहीं है बल्कि इस विशाल महाकुंभ की वजह से यूपी
के दूसरे तीर्थ स्थलों, जैसे वाराणसी, अयोध्या, मथुरा और विंध्यवासिनी धाम को भी काफी फायदा होने
की उम्मीद है l कुल मिलाकर इससे पर्यटन उद्योग में हजारों नए रोजगार पैदा हुए हैं और उत्तर प्रदेश
सरकार ने इस मेले में तमाम सुविधाओं को डिजिटल रूप में मुहैया कराने पर भी जोर दिया है l इस
महाकुंभ को प्रदेश सरकार ने ‘भव्य, दिव्य एवं डिजिटल’ का स्लोगन दिया है l
