rescue begging children madras: चेन्नई. मद्रास हाई कोर्ट ने सड़कों पर भीख मांगते बच्चों को लेकर सख्त रुख अपनाया है , कोर्ट ने आदेश दिया है कि ऐसे बच्चों को पाए जाने पर तुरंत रेस्क्यू किया जाए और 24 घंटे के भीतर प्रोटेक्शन सेंटर में रखा जाए यह आदेश चीफ जस्टिस एम.एम. श्रीवास्तव और जस्टिस जी. अरुलमुरुगन की बेंच ने दिया । कोर्ट ने कहा कि चेन्नई जैसे बड़े शहरों में बच्चे सड़कों, बस स्टेशनों और ट्रेनों में भीख मांगते दिखते हैं, जो बेहद चिंताजनक है।
वकील ने जताई बच्चों के शोषण की आशंका
इस मामले में चेन्नई के वकील तमिलवेंधन ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. उन्होंने मांग की थी कि यह जांच की जाए कि सड़कों पर बच्चों के साथ भीख मांगने वाली महिलाएं वास्तव में उनकी जैविक मां हैं या नहीं याचिका में कहा गया कि कई मामलों में महिलाओं और बच्चों के बीच कोई शारीरिक समानता नहीं दिखती । इसके अलावा बच्चे अक्सर धूप, शोर या भीड़ के बावजूद सोते रहते हैं जिससे शक और गहरा हो जाता है।
बच्चों को नशा देकर भीख मंगवाने का शक
वकील तमिलवेंधन ने कोर्ट को बताया कि आशंका है कि बच्चों को नींद की गोलियां शराब या अन्य नशीले पदार्थ दिए जा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई महिलाएं तमिल भाषा तक नहीं बोल पातीं . जिससे यह संदेह और बढ़ता है कि बच्चे किडनैप कर भीख के धंधे में लगाए जा रहे हैं।
rescue begging children madras: पहले रेस्क्यू बाद में पहचान की जांच
कोर्ट ने साफ कहा कि अगर कोई बच्चा सड़कों पर भीख मांगता पाया जाए तो पहले उसे सुरक्षित किया जाए। उ सके माता-पिता या अभिभावकों की पहचान बाद में जांच के जरिए की जा सकती है। हाई कोर्ट ने सरकार की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि 90 फीसदी मामलों में कोर्ट के आदेश के बाद ही कार्रवाई होती है। बेंच ने कहा कि सरकार कानूनों को पूरी तरह लागू नहीं कर रही है कोर्ट ने यह भी कहा कि बच्चों के माता-पिता की पहचान बर्थ सर्टिफिकेट के जरिए की जा सकती है।
