मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को तमिलनाडु के डिप्टी मुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म को लेकर दिए गए बयान पर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि उदयनिधि की यह टिप्पणी हेट स्पीच की श्रेणी में आती है और इसकी प्रकृति नरसंहार जैसी कही जा सकती है।
यह टिप्पणी 2023 में दिए गए उस बयान से जुड़ी है, जिसमें उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म की तुलना डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों से करते हुए कहा था कि इसे मिटा देना चाहिए। बयान के बाद देशभर में इसका तीखा विरोध हुआ था।
अमित मालवीय की याचिका पर फैसला
भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने उदयनिधि के भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया था। इसके बाद DMK के एक नेता ने मालवीय के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी और आरोप लगाया था कि वीडियो को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। मालवीय ने इस FIR को रद्द कराने के लिए मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच में याचिका दायर की थी। तीन साल बाद अब कोर्ट ने FIR रद्द कर दी है।
कोर्ट ने क्या कहा
जस्टिस एस. श्रीमथी ने अपने आदेश में कहा कि अमित मालवीय ने केवल उदयनिधि स्टालिन के सार्वजनिक बयान पर प्रतिक्रिया दी थी। ऐसी प्रतिक्रिया को अपराध मानना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। कोर्ट ने साफ किया कि राजनीतिक बयान पर प्रतिक्रिया देना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आता है।
