madras hc lgbtq family rights 2025 : समलैंगिक को लेकर मद्रास हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
madras hc lgbtq family rights 2025 : मद्रास हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा कि शादी ही परिवार बनाने का एकमात्र तरीका नहीं है। समलैंगिक जोड़े भी एक-दूसरे के साथ रहकर एक ‘परिवार’ का गठन कर सकते हैं।
इस फैसले के जरिए अदालत ने LGBTQ+ समुदाय को कानूनी और सामाजिक मान्यता की दिशा में एक बड़ा समर्थन दिया है।
👩❤️👩 दो महिलाओं को साथ रहने की अनुमति
यह फैसला दो महिलाओं की याचिका पर सुनवाई के दौरान आया।
एक महिला ने कोर्ट को बताया कि उसकी पार्टनर को उसके परिवार ने जबरन घर में कैद कर रखा है, और उससे मिलने नहीं दिया जा रहा।
जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन की बेंच ने यह याचिका सुनते हुए कहा:
“महज इसलिए कि वे समलैंगिक हैं, उन्हें साथ रहने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।”
🚨 ‘नॉर्मल’ बनाने की जबरदस्ती पर सख्त टिप्पणी
कोर्ट ने कहा कि पीड़िता को जबरन घर ले जाकर शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया और उस पर ‘सामान्य’ बनाने के लिए कुछ रस्में करने का दबाव बनाया गया।
जजों ने इस व्यवहार की निंदा करते हुए कहा कि:
“हम किसी को भी इस बात की इजाजत नहीं दे सकते कि वे किसी की लैंगिक पहचान या पसंद को बदलने की कोशिश करें।”
🧑⚖️ सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में क्या कहा था?
- 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने सेम सेक्स मैरिज को कानूनी मान्यता देने से इनकार कर दिया था।
CJI डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने कहा था कि:
- स्पेशल मैरिज एक्ट में बदलाव करना कोर्ट का काम नहीं, यह संसद का विषय है।
- कोर्ट केवल कानून की व्याख्या कर सकता है, बदलाव नहीं कर सकता।
जनवरी 2025 में इस फैसले के खिलाफ आईं 13 पुनर्विचार याचिकाएं भी खारिज कर दी गई थीं।
🏳️🌈 क्या कहा था CJI चंद्रचूड़ ने?
CJI ने कहा था:
“LGBTQ+ समुदाय के पास गरिमा से जीने का अधिकार है। वे प्यार कर सकते हैं, साथ रह सकते हैं, लेकिन विवाह की मान्यता देना संसद का काम है।”
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि LGBTQ+ जोड़ों को सिविल यूनियन और पार्टनरशिप के लिए कानूनी ढांचा विकसित किया जाना चाहिए।
🔍 क्यों यह फैसला अहम है?
- पहली बार हाईकोर्ट ने परिवार की परिभाषा को पारंपरिक शादी से आगे ले जाकर LGBTQ+ संबंधों को जगह दी है।
- कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानूनी मान्यता केवल विवाह पर आधारित नहीं होनी चाहिए।
यह LGBTQ+ अधिकारों के लिए कानूनी और सामाजिक दोनों स्तर पर एक बड़ी जीत मानी जा रही है।
📌 समाज बदलेगा, कानून साथ चलेगा
मद्रास हाईकोर्ट का यह फैसला LGBTQ+ समुदाय के लिए आशा की किरण है।
जहां सुप्रीम कोर्ट ने सेम सेक्स मैरिज को मंजूरी नहीं दी, वहीं हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि प्यार और सहमति से बना रिश्ता भी उतना ही वैध है।
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