MadhyaPradesh: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इन दिनों बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं, लेकिन इसी बीच उनकी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। यह तस्वीर 1 नवंबर को मध्यप्रदेश स्थापना दिवस की है, जिसमें वे श्रीकृष्ण का रूप धरे एक बच्चे को गोद में लिए दिखाई दे रहे हैं।

नीतियों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता
तस्वीर में दोनों के बीच भावनात्मक जुड़ाव झलकता है, मानो “मोहन के मन में मोहन” बस गए हों। यह भाव केवल तस्वीर में नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री के कार्यों और नीतियों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
जहां-जहां श्रीकृष्ण के चरण पड़े, वे स्थल तीर्थ बनेंगे
सीएम डॉ. मोहन यादव श्रीकृष्ण भक्ति को अपने शासन और राजनीति से जोड़ चुके हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने ‘श्रीकृष्ण पाथेय न्यास’ की स्थापना की, जिसका उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण के मध्यप्रदेश प्रवास से जुड़े स्थलों का संरक्षण और विकास करना है। उनका मानना है कि “जहां-जहां श्रीकृष्ण के चरण पड़े, वे स्थल तीर्थ बनेंगे।”
MadhyaPradesh: 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये प्रतिदिन कर दिया
गौसेवा को भी उन्होंने अपनी प्राथमिकता में शामिल किया। राज्य की गौशालाओं को प्रति गाय मिलने वाला अनुदान 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया।
जून 2024 में उन्होंने राज्य स्तरीय गौशाला सम्मेलन में सिंगल क्लिक से राशि ट्रांसफर की और कहा कि “गौसेवा भारतीय संस्कृति की आत्मा है।”
ससे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बना
श्रीमद्भगवद्गीता के प्रचार के लिए भी उन्होंने बड़ा कदम उठाया। 11 दिसंबर 2024 को भोपाल में गीता जयंती पर आयोजित सामूहिक गीता पाठ में 7,000 से अधिक आचार्यों ने भाग लिया, जिससे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बना।
डॉ. यादव ने 413 नगरीय निकायों में ‘गीता भवन’ निर्माण की योजना की घोषणा की, जिसकी लागत लगभग ₹2,875 करोड़ होगी।
MadhyaPradesh: ग्रामीण विकास में भी उन्होंने धार्मिक भावनाओं को जोड़ा। ‘मुख्यमंत्री वृंदावन ग्राम योजना’ के तहत हर गांव को आत्मनिर्भर, पर्यावरण-अनुकूल और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाने की पहल की गई है।
इसी तरह, राज्य के ‘सीएम राइज स्कूलों’ का नाम बदलकर ‘सांदीपनि स्कूल’ रखा गया है, जो भगवान कृष्ण और बलराम के गुरुकुल से प्रेरित है।
सरकारी अवकाश के रूप में मनाया जाता
त्योहारों को सांस्कृतिक पहचान देने के लिए डॉ. यादव ने जन्माष्टमी और गोवर्धन पूजा को राजकीय स्तर पर मनाने का निर्णय लिया। अब गोवर्धन पूजा को सरकारी अवकाश के रूप में मनाया जाता है।
भोपाल और मुख्यमंत्री निवास पर वे स्वयं विधि-विधान से गोपूजन करते हैं।
डॉ. यादव के कार्य यह दर्शाते हैं कि वे केवल राजनीति नहीं, बल्कि संस्कृति और आस्था से जुड़ा नेतृत्व प्रस्तुत कर रहे हैं। वे अक्सर कहते हैं… “जहां गाय, वहां गोकुल; जो गाय की सेवा करे, वही गोपाल।”
वास्तव में, मुख्यमंत्री मोहन यादव की राजनीति और व्यक्तित्व दोनों में श्रीकृष्ण की करुणा, नीति और प्रेरणा की झलक साफ दिखाई देती है।
