Madhya Pradesh Tragedy: कफ सिरप बना मौत का कारण.. नहीं थम रहा मौत का सिलसिला… बता दें की मध्यप्रदेश में कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से अब तक 19 बच्चों की मौत हो चुकी है। छिंदवाड़ा, बैतूल, नागपुर और पांढुर्णा में यह हादसे सामने आए हैं। जांच में बड़ा खुलासा हुआ है कि सिरप बनाने में नॉन-फार्मास्यूटिकल ग्रेड का जहरीला केमिकल इस्तेमाल किया गया था…

100 किलो प्रोपलीन ग्लायकॉल खरीदा था
तमिलनाडु के ड्रग्स कंट्रोल विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीसन फार्मास्युटिकल्स ने मार्च 2025 में चेन्नई की सनराइज बायोटेक से 100 किलो प्रोपलीन ग्लायकॉल खरीदा था, जो दवा निर्माण के लिए उपयुक्त नहीं था। कंपनी ने इस केमिकल की न तो टेस्टिंग करवाई, न ही बिल या खरीद की कोई एंट्री बुक में दर्ज की गई। पेमेंट कभी नकद और कभी GPay से किया गया।
Madhya Pradesh Tragedy: किडनी और दिमाग को नुकसान पहुंचा सकती
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सिरप में डाईएथिलीन ग्लायकॉल (DEG) और एथिलीन ग्लायकॉल (EG) जैसे जानलेवा केमिकल्स की मात्रा तय सीमा से 486 गुना अधिक पाई गई। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह मात्रा न सिर्फ बच्चों, बल्कि किसी विशाल जानवर की भी किडनी और दिमाग को नुकसान पहुंचा सकती है।
बोतलें छिंदवाड़ा भेजने के लिए तैयार मिलीं
जांच के दौरान कोल्ड्रिफ सिरप (बैच SR-13) की 589 बोतलें छिंदवाड़ा भेजने के लिए तैयार मिलीं। इसी बैच की दवा पीने से बच्चों की किडनी फेल और दिमाग में सूजन आई, जिससे उनकी मौत हुई। यह बैच मई 2025 में तैयार हुआ था और इसकी एक्सपायरी अप्रैल 2027 है।
जिससे संदेह और बढ़ गया
कंपनी पर दस्तावेज़ छिपाने का भी आरोप है। निरीक्षण के वक्त कंपनी के पास प्रोपलीन ग्लायकॉल का कोई स्टॉक नहीं मिला, जिससे संदेह और बढ़ गया।
Madhya Pradesh Tragedy: गुणवत्ता मानक के अनुसार पाई गई
जांच में कुल 5870 बोतलें मिलीं, जिनमें कोल्ड्रिफ के अलावा रेस्पोलाइट डी, जीएल, एसटी और हेपसंडिन सिरप भी थे। इनमें से बाकी सिरप की गुणवत्ता मानक के अनुसार पाई गई।
बच्चों से मुलाकात की और इलाज की समीक्षा की
राज्य सरकार ने बीमार बच्चों के इलाज की जिम्मेदारी ली है। फिलहाल छिंदवाड़ा और बैतूल के 9 बच्चे नागपुर के अस्पतालों में भर्ती हैं। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने मंगलवार रात अस्पताल पहुंचकर बच्चों से मुलाकात की और इलाज की समीक्षा की।
दोषियों पर सख्त कार्रवाई की बात कही
सरकार ने नागपुर में विशेष डॉक्टरों और अधिकारियों की टीम तैनात की है। जांच जारी है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की बात कही गई है।
मध्य प्रदेश सरकार ने एसआईटी बनाई
सीएम डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश के ड्रग कंट्रोलर दिनेश मौर्य को हटा दिया है। उन्होंने खाद्य एवं औषधि प्रशासन के उपसंचालक शोभित कोष्टा, छिंदवाड़ा के ड्रग इंस्पेक्टर गौरव शर्मा और जबलपुर ड्रग इंस्पेक्टर शरद जैन को सस्पेंड करने के निर्देश भी दिए हैं। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के संचालक दिनेश श्रीवास्तव को फूड और ड्रग कंट्रोलर का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है।
सरकार ने मामले की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई है। जबलपुर, छिंदवाड़ा, बालाघाट और मंडला जिलों के ड्रग इंस्पेक्टर शामिल हैं।
