madhavrao scindia death anniversary: 30 सितंबर ये वो तारीख है जिसदिन देश ने एक ऐसी शख्सियत को खो दिया.जो दुर्लभ थी.इसी दिन एक ग्वालियर का सियासी सूर्य अस्त हो चुका था नाम था माधवराज सिंधिया जिन्हें लोग प्यार से ‘माधव भैया’ कहकर बुलाते थे, भारतीय राजनीति की उन दुर्लभ शख्सियतों में से थे, जो राजघराने की पृष्ठभूमि से आए लेकिन पूरी तरह जनता से जुड़े हुए नेता बने। 10 मार्च 1945 को मुंबई में जन्मे माधवराव, ग्वालियर की राजमाता विजयाराजे सिंधिया और जीवाजीराव सिंधिया के पुत्र थे।
जनसंघ से शुरुआत, कांग्रेस में पहचान
माधवराव ने 1971 में जनसंघ से राजनीति की शुरुआत की और पहले ही चुनाव में भारी मतों से जीत दर्ज कर राष्ट्रीय पहचान बनाई। हालांकि बाद में उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा और 1984 में ग्वालियर से अटल बिहारी वाजपेयी को हराकर राजनीतिक भूचाल ला दिया। यह कांग्रेस के लिए बड़ी जीत थी और भाजपा के गढ़ में सेंधमारी जैसा था।
भारत में बुलेट ट्रेन का सपना: सिंधिया का सपना
रेल मंत्री के तौर पर माधवराव सिंधिया ने भारत में सबसे पहले बुलेट ट्रेन का विचार प्रस्तुत किया था। उस समय देश की रेल व्यवस्था पारंपरिक पटरियों तक सीमित थी, लेकिन सिंधिया ने तेज रफ्तार और आधुनिक भारत की कल्पना की। भले ही यह सपना दशकों बाद हकीकत की ओर बढ़ा, लेकिन इसकी नींव माधवराव ने ही रखी थी।
नरसिंह राव सरकार में मंत्री पद से इस्तीफा
जब वे नरसिंह राव सरकार में नागरिक उड्डयन मंत्री थे, तो एक विमान दुर्घटना के बाद उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया। यह उस दौर में भी दुर्लभ था, जब ज़्यादातर नेता पद पर चिपके रहते थे। उनकी इस नैतिकता ने उन्हें आम राजनेताओं से अलग पहचान दी।
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madhavrao scindia death anniversary: खेल, कला और संस्कृति से लगाव
माधवराव सिर्फ एक राजनेता नहीं थे। उन्हें क्रिकेट, गोल्फ और घुड़सवारी जैसे खेलों से गहरा लगाव था। वे खुद एक बेहतरीन खिलाड़ी थे और क्रिकेट बोर्ड के प्रशासक के तौर पर भी उन्होंने बड़ी भूमिका निभाई। साथ ही, कला, फिल्म और संगीत में भी उनकी रुचि ने उन्हें बहुआयामी व्यक्तित्व बनाया।
राजीव गांधी के बाद कांग्रेस का भविष्य माने गए
1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद जब कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर चर्चा शुरू हुई, तो माधवराव सिंधिया और राजेश पायलट को नेक्स्ट जेनरेशन लीडर के रूप में देखा गया। हालांकि बाद में समीकरण बदल गए और नरसिंह राव प्रधानमंत्री बने। लेकिन माधवराव की स्वीकार्यता हर वर्ग में थी।
madhavrao scindia death anniversary: 30 सितंबर 2001: एक युग का अंत
30 सितंबर 2001 को एक विमान दुर्घटना में देश ने माधवराव सिंधिया को खो दिया। इस हादसे ने देश की राजनीति को झकझोर दिया। वे केवल 56 वर्ष के थे, और उनमें अनुभव, ऊर्जा और भविष्य की उम्मीदें थीं। उनकी असमय मौत एक ऐसा खालीपन छोड़ गई जिसे आज भी महसूस किया जाता है।
अब बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया संभाल रहे विरासत
madhavrao scindia death anniversary : उनकी मृत्यु के बाद उनके पुत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राजनीति में कदम रखा और आज वे केंद्रीय मंत्री हैं। उन्होंने अपने पिता की राजनीतिक विरासत और जनता से जुड़ाव को आगे बढ़ाया है।
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