lumpy virus livestock bhopal: प्रदेश में पशुपालकों के जानवर लंपी जैसे संक्रमण में फंसकर अपनी जान गंवा रहे हैं। गौवंशीय पशुओं को प्रभावित करने वाले इस संक्रमण का भोपाल सहित झाबुआ, रतलाम, बैतूल, बड़वानी, सिवनी और सागर जैसे जिलों में सबसे अधिक प्रभाव देखा गया है। वहीं, विभाग के लापरवाह रवैये के कारण पार्टुना और जबलपुर जैसे जिलों के पशुपालक भी चिंता में हैं।
वायरस को रोकने ठोस कदम नहीं
संक्रमण की चपेट में आने के बाद जानवरों के दूध में कमी आई है, वहीं कई जानवर मर भी रहे हैं। बावजूद इसके, एडवायजरी जारी करने के अलावा राज्य पशुपालन विभाग द्वारा नियंत्रण के ठोस प्रयास नहीं किए गए हैं। इस कड़ी में लंपी स्किन बीमारी की रोकथाम एवं निगरानी के लिए स्थापित राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम भी मदद नहीं कर पा रहा है। अधिकृत दूरभाष नंबर 0755-2767583 लगातार व्यस्त रहने के कारण प्रदेश के पशुपालकों ने इसे अनुपयोगी माना है।
टीकाकरण और सजगता से संक्रमित पशु दो-तीन सप्ताह में ठीक हो जाते हैं, लेकिन दूध उत्पादकता में कमी कई सप्ताह तक बनी रहती है, जिसका खामियाजा पशुपालकों को भुगतना पड़ता है।
lumpy virus livestock bhopal: संक्रमण के लक्षण और फैलाव
रोग की शुरूआत में हल्का बुखार दो-तीन दिन के लिए रहता है। इसके बाद पूरे शरीर की चमड़ी में गठानें निकल आती हैं। ये गठानें गोल और उभरी हुई आकृति की होती हैं। बीमारी के लक्षण मुंह, गले और श्वासनली तक फैल जाते हैं, साथ ही पैरों में सूजन, दुग्ध उत्पादकता में कमी, गर्भपात, बांझपन और कभी-कभी मृत्यु भी हो जाती है। यह रोग मच्छर, काटने वाली मक्खी और कील जैसी कीटों से एक पशु से दूसरे पशुओं में फैलता है।
1.87 करोड़ पशुओं में सिर्फ 41.5 लाख का टीकाकरण
प्रदेश में 1 करोड़ 87 लाख गौवंश है, लेकिन विभाग द्वारा केवल 41.5 लाख पशुओं में ही एलएसडी रोग का टीकाकरण किया गया है। इससे संक्रमण बढ़ रहा है और पशुओं की मौत का कारण बन रहा है।
जबलपुर और पांढुर्णा में हो रही मौतें
जबलपुर नगर निगम की गोशाला में गुरुवार को 8 गोवंश मृत पाए गए। गोशाला प्रभारी ने इसके लिए लंपी वायरस को जिम्मेदार ठहराया। वहीं पांढुर्णा जिले में भी 15 से अधिक गोवंश की मौतें हुई हैं। छिंदवाड़ा प्रयोगशाला ने मृत गोवंश में पॉजिटिव वर्गाकार बैक्टीरिया मिलने का दावा किया है। बताया गया है कि गांव में संक्रमित दूध पीने से दो बच्चों समेत पांच लोग बीमार भी हुए हैं।
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