lucknow firecracker factory blast deaths: पटाखा फैक्ट्री में धमाका, 1 KM दूर तक सुनाई दी आवाज

lucknow firecracker factory blast deaths: लखनऊ: रविवार की सुबह लखनऊ के बेहटा इलाके में एक पटाखा फैक्ट्री में भयंकर धमाका हुआ। इस हादसे में फैक्ट्री के मालिक और उनकी पत्नी समेत 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि 10 से अधिक लोग घायल हो गए। धमाका इतना भीषण था कि आसपास के 2-3 मकान टूट गए और 1 किलोमीटर दूर तक इसकी आवाज सुनाई दी। घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल है, और रेस्क्यू टीमें मलबे में दबे लोगों को निकालने की कोशिश कर रही हैं।
अवैध फैक्ट्री में हुआ हादसा: सिलेंडर फटने की आशंका
शुरुआती जांच में पता चला है कि यह पटाखा फैक्ट्री अवैध थी और रिहायशी इलाके में चल रही थी। धमाका रविवार दोपहर करीब 12 बजे हुआ। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि धमाका कैसे हुआ, लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि गैस सिलेंडर फटने से यह हादसा हुआ। पुलिस ने फिलहाल 2 मौतों की पुष्टि की है, लेकिन मलबे में और लोग दबे होने की आशंका है। कई शव बुरी तरह झुलस गए हैं, और रेस्क्यू टीमें जेसीबी मशीन की मदद से मलबा हटा रही हैं।
रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
हादसे के बाद डीएम, पुलिस कमिश्नर और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंच गई हैं। स्थानीय लोगों ने पुलिस के पहुंचने से पहले ही घायलों को अस्पताल पहुंचाना शुरू कर दिया था। बाराबंकी से भी फायर ब्रिगेड की टीमें रेस्क्यू में जुटी हैं। घायलों को बाराबंकी जिला अस्पताल और लखनऊ के अस्पतालों में भेजा जा रहा है। घटनास्थल के आसपास के इलाके को पुलिस ने खाली कराया है।

क्या अवैध फैक्ट्रियों पर लगेगी लगाम?
यह हादसा एक बार फिर से सवाल खड़े करता है क्या अवैध फैक्ट्रियों पर कभी लगाम लगेगी? हर साल दिवाली के समय पटाखा फैक्ट्रियों में हादसे होते रहते हैं, लेकिन सरकारी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते। क्या इस बार प्रशासन सख्ती दिखाएगा? या फिर यह सिर्फ एक और हादसा बनकर रह जाएगा?
मौके पर अफरा-तफरी: 1000 से ज्यादा लोग जमा
घटनास्थल पर करीब 1000 लोग जमा हो गए हैं। एम्बुलेंस के जरिए घायलों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए जेसीबी मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। बगल के घरों की दीवारें भी टूट गई हैं, जिससे आसपास के लोगों में दहशत का माहौल है।
एक और हादसा, एक और सवाल

लखनऊ की यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं है, बल्कि एक सवाल है क्या हमारी सुरक्षा के लिए कोई जिम्मेदार है? अवैध फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों की जान खतरे में होती है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती। क्या इस बार प्रशासन जागेगा? या फिर यह सब भुला दिया जाएगा?
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