Lord Jagannath: राजगढ़ कस्बे में आयोजित भगवान जगन्नाथ मेले के पांचवें दिन मंगलवार रात को एक अद्भुत और आध्यात्मिक दृश्य देखने को मिला, जब भगवान जगन्नाथ और माता जानकी का विवाह समारोह संपन्न हुआ। आषाढ़ शुक्ल षष्ठी के इस शुभ अवसर पर हजारों श्रद्धालु इस अलौकिक विवाह के साक्षी बने और भक्ति और उल्लास का माहौल छा गया।

Lord Jagannath: कोई भगवान के दर्शन और झलक पाने को आतुर
यह आयोजन कस्बे के गंगाबाग में चल रहे मेले के दौरान हुआ, जहां वरमाला महोत्सव की रस्म पूरी की गई। भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा महोत्सव के तहत माता जानकी और भगवान जगन्नाथ का पाणिग्रहण संस्कार वेद मंत्रों की गूंज के बीच विधिपूर्वक सम्पन्न किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ फेरों की रस्म पूरी की गई और वरमाला का कार्यक्रम भी सम्पन्न हुआ। भगवान की दिव्य झांकी को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हर कोई भगवान के दर्शन और झलक पाने को आतुर नजर आया।
Lord Jagannath: जिससे वातावरण भक्तिमय हो उठा
विवाह कार्यक्रम से पूर्व कस्बे के चौपड़ बाजार स्थित प्राचीन मंदिर से शाम करीब साढ़े सात बजे माता जानकी की सवारी गाजे-बाजे के साथ गंगाबाग पहुंची। वहां पुष्पवर्षा कर माता जानकी का स्वागत किया गया। पूरे मेला स्थल पर “जय श्री जगन्नाथ” के जयकारों की गूंज सुनाई दी, जिससे वातावरण भक्तिमय हो उठा।
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया
इस आयोजन में ठिकाना गंगाबाग पर महंत पूरनदास और पंडित मदनमोहन शास्त्री पहुंचे। महंत प्रकाश दास ने भगवान की अगवानी करते हुए पुष्पवर्षा की। बारातियों के लिए भंडारे का आयोजन भी किया गया, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
Lord Jagannath: धार्मिक कार्यक्रम श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे
गंगाबाग में चल रहे भगवान जगन्नाथ मेले के पांचवें दिन कस्बा और आसपास के गांवों से भारी संख्या में श्रद्धालु मेले में पहुंचे। मेले में जगह-जगह सजी भव्य झांकियां और धार्मिक कार्यक्रम श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं।
भगवान जगन्नाथ और माता जानकी के विवाह समारोह ने न केवल धार्मिक आस्था को और प्रगाढ़ किया, बल्कि समाज को एकजुट करने का संदेश भी दिया। पूरा माहौल श्रद्धा, उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा।
