Lord Hanuman Temple MP: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में तो वैसे कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, उन्हीं मंदिर में से एक खटलापुरा मंदिर है, जहां हनुमान जी की प्रतिमा विराजमान है। यह मंदिर पूरे शहर में खटलापुरा हनुमान मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है।
बता दें कि, यह मंदिर भोपाल के छोटा तालाब के किनारे स्थित है। इससे आसपास बहुत सुंदर प्राकृति सुंदरता देखने को मिलती है। यह मंदिर अपनी शांत जगह, हनुमान जी की मूर्ति और तालाब के किनारे होने के कारण प्रसिद्ध है।
करीब 180 साल पुराना है ये मंदिर
यह मंदिर बेहद प्राचीन है, बताया जाता है कि यह मंदिर करीब 180-200 वर्ष पुराना है। इस मंदिर के निर्माण की दो कथाएं है, कोई कहता है, इसका निर्माण राज दरबारी राय चलनलाल ने करवाया था, क्योंकि वो भगवान हनुमान जी के परम भक्त थे। वहीं कई लोग बताते हैं कि, साल 1840 के आसपास अयोध्या के संतों द्वारा इस प्रतिमा को स्थापित किया गया था।

हनुमानजी के अलावा ये देवी- देवता हैं विराजमान
मंदिर परिसर में भगवान हनुमान के अलावा मंदिर परिसर में राम, लक्ष्मण, सीता, शिव, और गणेशजी की मूर्तियां भी स्थापित हैं।

उत्तर भारतीय वास्तुकला की पारंपरिक शैली में बने इस मंदिर में भगवान हनुमान की मुख्य प्रतिमा अर्धशिला रूप में विराजमान हैं, जिसका मुख पूर्व दिशा की ओर है और मंदिर का प्रवेश द्वार उत्तर दिशा की ओर है। जिसमें खूबसूरती से तराशा हुआ गर्भगृह है, जिसमें भगवान हनुमान की प्रतिमा विराजमान है। यह प्रतिमा सिंदूर से ढकी हुई है, जो भक्ति और आस्था का प्रतीक माना जाता है।

नदी के अंदर मिली थी प्रतिमा
स्थानीय लोगों के मुताबिक, भगवान हनुमान की प्रतिमा भोपाल के निचली झील के जल में मिली थी, जिसे बाद में मंदिर बनवाकर स्थापित कर दिया गया। यहां मुख्य रूप से हनुमान जी की पूजा की जाती है।
भक्तों का मानना है कि, इस स्थान में वास करने के लिए स्वयं भगवान हनुमान जी ने चुना, जिससे यह स्थान भक्ति केंद्र बन गया है। कई सालो से यह मंदिर भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने के लिए प्रसिद्ध है, विशेषकर उन लोगों की जो शक्ति, साहस और बाधाओं से सुरक्षा चाहते हैं।

इस दिन लगती है भक्तों की भीड़
मंदिर में कई त्योहार भव्य रुप से मनाए जाते हैं, जिनमें हनुमान जयंती सबसे महत्वपूर्ण है, जिसे जुलूसों, विशेष प्रार्थनाओं और भजनों के साथ मनाया जाता है। यहां हनुमान जयंती, राम नवमी को विशेष आयोजन किए जाते हैं। वहीं मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान जी की विशेष रुप से पूजा की जाती है।
पिंडदान करने आते हैं लोग
मंदिर के पीछे का घाट पितृपक्ष में तर्पण और पिंडदान के लिए जाना जाता है। पितृपक्ष में लोग यहां तर्पण करने भी आते हैं।
यह मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थान है, बल्कि यह अपने शांत और प्राकृतिक वातावरण की वजह से भी प्रसिद्ध है। लोगों के लिए एक प्रिय स्थान है, जहां वे शांति और सुकून पाते हैं।
