Lip Dissolve Treatment: आज की दुनिया में सौंदर्य और आत्म-विश्वास के बीच एक गहरा संबंध बन चुका है। अपने चेहरे की सुंदरता को बढ़ाने के लिए लोग अब विभिन्न कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट्स का सहारा ले रहे हैं। इनमें सबसे लोकप्रिय प्रक्रियाओं में से एक है लिप फिलर और इसके बाद आने वाला ट्रीटमेंट, जिसे कहा जाता है – लिप डिजॉल्व ट्रीटमेंट। हाल ही में एक्ट्रेस और सोशल मीडिया पर्सनालिटी उर्फी जावेद के इस ट्रीटमेंट को लेकर सामने आए वीडियो ने इस विषय को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।
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तो आखिर यह ट्रीटमेंट है क्या? इसे क्यों करवाया जाता है? इसके क्या फायदे और नुकसान हैं? आइए जानते हैं इस रिपोर्ट में।
क्या होता है लिप डिजॉल्व ट्रीटमेंट?
लिप डिजॉल्व ट्रीटमेंट एक कॉस्मेटिक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य पुराने लिप फिलर्स को डिसॉल्व यानी घोल कर हटाना होता है। जब किसी व्यक्ति को यह महसूस होता है कि उसके होंठों में लगे फिलर्स असमान, असंतुलित या अत्यधिक हो गए हैं, या उन्हें नेचुरल लुक में वापसी करनी है, तब यह ट्रीटमेंट किया जाता है।
इस प्रक्रिया में एक खास एंजाइम – हायल्यूरोनिडेस (Hyaluronidase) का इस्तेमाल किया जाता है, जो होंठों में पहले से मौजूद हायल्यूरोनिक एसिड फिलर्स को घोल देता है और शरीर उन्हें धीरे-धीरे अवशोषित कर लेता है।

यह ट्रीटमेंट क्यों करवाया जाता है?
1. गलत तरीके से लगे फिलर्स हटाने के लिए।
2. लुक नेचुरल नहीं दिखने पर।
3. फिलर्स से एलर्जी या इंफेक्शन होने पर।
4. चेहरे के सिमिट्री को फिर से संतुलित करने के लिए।
5. सोशल मीडिया या ट्रेंड्स के कारण बार-बार किए गए बदलावों से ब्रेक लेने के लिए।
ट्रीटमेंट कैसे किया जाता है?
1. प्रक्रिया से पहले डॉक्टर मरीज के होठों की हालत का परीक्षण करते हैं।
2. फिर एक लोकल एनेस्थीसिया (numbing cream या injection) लगाया जाता है।
3. इसके बाद हायल्यूरोनिडेस इंजेक्शन को उस हिस्से में डाला जाता है, जहां फिलर्स मौजूद हैं।
4. कुछ घंटों से लेकर 48 घंटे में यह एंजाइम फिलर्स को तोड़ देता है।
5. रिजल्ट कुछ ही दिनों में दिखने लगता है।
लिप डिजॉल्व के साइड इफेक्ट्स और जोखिम…
हालांकि यह प्रक्रिया आमतौर पर सुरक्षित मानी जाती है, लेकिन कुछ मामलों में इससे जुड़ी जटिलताएं भी सामने आ सकती हैं:
सूजन और दर्द..
इंजेक्शन वाली जगह पर कुछ समय के लिए सूजन, जलन और दर्द महसूस हो सकता है।
एलर्जी रिएक्शन…
अगर शरीर को इस्तेमाल किया गया एंजाइम सूट न करे, तो एलर्जी हो सकती है।
ब्लड वेसेल ब्लॉकेज…
गलत तरीके से इंजेक्शन लगाने पर नसों में फिलर चले जाने से ब्लड सर्कुलेशन रुक सकता है, जिससे टिशू डैमेज या स्किन नेक्रोसिस (त्वचा का मर जाना) जैसी स्थिति बन सकती है।
इंफेक्शन…
अगर ट्रीटमेंट किसी प्रशिक्षित डॉक्टर द्वारा ना किया गया हो तो संक्रमण का खतरा रहता है।
लिप एसिमिट्री..
ट्रीटमेंट के बाद दोनों होंठों की शेप में फर्क आ सकता है, जिसे सुधारने के लिए और ट्रीटमेंट्स की जरूरत पड़ सकती है।

कैसे करें केयर?
ट्रीटमेंट के बाद आफ्टर केयर बहुत महत्वपूर्ण है। डॉक्टर की सलाह के बिना कोई घरेलू उपाय या मेडिकेशन न करें। कुछ जरूरी सुझाव:
1. बर्फ से होंठों की सिकाई करें।
2. बहुत गर्म या मसालेदार खाना न खाएं।
3. होंठों पर ज्यादा प्रेशर न डालें।
4. एंटीबायोटिक्स या पेनकिलर्स केवल डॉक्टर की सलाह पर लें।
5. ट्रीटमेंट के बाद 24 से 48 घंटे तक मेकअप न करें।
क्या ट्रीटमेंट करवाना सुरक्षित है?
विशेषज्ञों की मानें तो यह प्रक्रिया तभी सुरक्षित होती है, जब इसे किसी प्रशिक्षित, प्रमाणित और अनुभवी कॉस्मेटिक डॉक्टर द्वारा किया जाए। किसी इंस्टाग्राम ऐड, लोकल क्लीनिक या बिना अनुभव वाले ब्यूटी सैलून में जाकर ऐसा ट्रीटमेंट करवाना खतरनाक साबित हो सकता है।
कुछ जरूरी सावधानियों का रखे ध्यान…
1. ट्रीटमेंट से पहले डॉक्टर की क्वालिफिकेशन और क्लीनिक की स्थिति की जांच करें।
2. यदि कोई पुरानी बीमारी है, दवा चल रही है, या एलर्जी है – तो डॉक्टर को बताएं।
3. प्रेग्नेंसी या ब्रेस्टफीडिंग के दौरान ऐसे ट्रीटमेंट से बचें।
4. सोशल मीडिया ट्रेंड के दबाव में कोई भी प्रक्रिया न करवाएं।
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