एक चाय की दुकान, एक सपना और एक मां की साड़ी
life struggles motivation hindi: दिल्ली की गलियों में एक छोटा सा ठेला था, जिस पर लिखा था “राजू टी स्टॉल”। दूर से देखने पर कुछ खास नहीं लगता था। लेकिन उसके पीछे छुपी थी एक ऐसी कहानी, जो किसी फिल्म से कम नहीं।
राजू, सिर्फ 24 साल का था जब उसके पिता की मौत हो गई। घर में मां और दो छोटे भाई। पढ़ाई अधूरी रह गई, और जिम्मेदारियों का पहाड़ सिर पर आ गिरा।
एक दिन मां की अलमारी खोली… और साड़ियों की जगह खालीपन मिला
वो दिन राजू कभी नहीं भूलता जब घर में खाने के पैसे नहीं थे। गैस खत्म हो चुकी थी और दुकान पर भी उधारी बढ़ गई थी। मां चुपचाप कमरे में गईं और अपनी सबसे पसंदीदा बनारसी साड़ी निकालकर बोलीं — “इससे शायद आज की चाय बन जाए…”
राजू के हाथ कांप उठे। वो जो साड़ी मां ने कभी शादी में पहनी थी, आज वही बिकने जा रही थी।
life struggles motivation hindi: उस दिन तय किया अब हार नहीं मानूंगा
राजू ने उसी दिन तय किया कि अब न कभी मां की साड़ी बिकेगी, न खुद्दारी। उसने दिन-रात एक कर दिए। सुबह 5 बजे दूध लाना, दोपहर तक दुकान पर खड़ा रहना और रात को ऑर्डर डिलिवरी करना यही रूटीन बन गया।
धीरे-धीरे, लोगों को उसकी चाय पसंद आने लगी। फिर उसने Instagram पर #DesiChaiwala के नाम से एक पेज शुरू किया। आज उसके पास दो आउटलेट हैं, और आने वाले साल में फ्रेंचाइज़ी खोलने का प्लान है।
असली जीत वो होती है जो आंसुओं से होकर निकले
हम अक्सर सोचते हैं कि संघर्ष सिर्फ बड़ी चीज़ों में होता है नौकरी, पैसा, सफलता। लेकिन कभी-कभी, असली संघर्ष एक मां की साड़ी बचाने में छुपा होता है।
राजू की कहानी कोई काल्पनिक किस्सा नहीं है। ये हमारे समाज में हज़ारों ऐसे युवाओं की हकीकत है, जो चुपचाप हर दिन सपनों की लड़ाई लड़ते हैं।
तो अगली बार जब ज़िंदगी मुश्किल लगे, तो याद रखना शायद तुम भी अपनी “राजू वाली कहानी” लिख रहे हो।
Read More:- जिंदगी में होना है सफल तो घर के वास्तु में करें छोटा सा बदलाव
क्या आपने भी कभी कुछ ऐसा किया है जो आज भी याद आता है? कमेंट में ज़रूर शेयर करें
शायद किसी और को हिम्मत मिल जाए।
Read More:- क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी सुबह की शुरुआत कैसी होनी चाहिए?
