lg sinha jobs pakistan shelling victims poonch : पूंछ से एल-जी मनोज सिन्हा बड़ा ऐलान!
lg sinha jobs pakistan shelling victims poonch : जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा के पास हुई पाकिस्तान की हालिया गोलाबारी में मारे गए नागरिकों के परिवारों को अब राहत की एक बड़ी किरण मिली है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने गुरुवार को पूंछ जिले में ऐलान किया कि इस गोलाबारी में जिन लोगों की मौत हुई है, उनके परिजनों को सरकार “मानवीय आधार” पर सरकारी नौकरी देगी।
गोलाबारी में 18 लोगों की दर्दनाक मौत
इस हालिया हिंसक झड़प में पाकिस्तान की तरफ से की गई अंधाधुंध गोलाबारी में कुल 18 लोग मारे गए, जिनमें 13 पूंछ, 3 राजौरी और 2 जम्मू जिले के निवासी थे। इसके साथ ही कई मकान, दुकानें, और पशुधन भी इस हमले में बर्बाद हुए।
पूंछ में एक भावुक सभा को संबोधित करते हुए एल-जी सिन्हा ने कहा:
“किसी भी जान की भरपाई नहीं की जा सकती, लेकिन सरकार ने पहले ही मृतकों और घायलों के परिजनों को उचित आर्थिक सहायता दी है। अब हमने निर्णय लिया है कि मृतकों के परिजनों को सरकारी नौकरी भी दी जाएगी ताकि वे एक सम्मानजनक जीवन जी सकें।”
शोकाकुल परिवारों से मिले एल-जी
एल-जी मनोज सिन्हा ने पूंछ के प्रभावित इलाकों का दौरा कर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और उनका दुख साझा किया। उन्होंने कहा कि वे पहले यहां नहीं आ सके थे, लेकिन अब वह व्यक्तिगत रूप से यहां आकर उन परिवारों से मिलना चाहते थे जिन्होंने अपनों को खोया है।
इस दौरे के दौरान एल-जी ने प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के साथ भी बैठक की और पुनर्वास व राहत कार्यों की समीक्षा की।
घर और संपत्ति के नुकसान की होगी भरपाई
एल-जी सिन्हा ने यह भी कहा कि प्रशासन अब प्रभावित मकानों और संपत्तियों का आकलन कर रहा है, और जिनके घर और दुकानें नष्ट हो गई हैं, उन्हें सरकार द्वारा पुनर्वास किया जाएगा।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि सुरक्षा कारणों से अब सीमावर्ती क्षेत्रों में बंकर बनाने की योजना पर भी काम हो रहा है।
“जिला प्रशासन ने बंकर निर्माण की जरूरत पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी है, और सुरक्षा से संबंधित खर्च के तहत इन बंकरों का निर्माण भी किया जाएगा।”
पाकिस्तान की कायराना हरकत और भारत की जवाबदेही
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पाकिस्तान की तरफ से बार-बार हो रही गोलाबारी पर भारत को कड़ा और स्थायी कदम उठाने की जरूरत है।
हालांकि, एल-जी सिन्हा द्वारा घोषित मानवीय सहायता और नौकरी योजना एक सकारात्मक पहल है, जो न केवल प्रभावित परिवारों को राहत देगी बल्कि एक संदेश भी देगी कि भारत अपने नागरिकों को अकेला नहीं छोड़ता।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रियाएं
राजौरी निवासी शरीफ अहमद, जिनके भाई की गोलाबारी में मौत हुई, ने कहा:
“हमारे लिए यह एक राहत की खबर है। सरकार ने हमारी पीड़ा को समझा और अब नौकरी मिलने से हमारे परिवार को दोबारा खड़ा होने का मौका मिलेगा।”
पूंछ निवासी शाहिदा बेगम, जिनके पिता इस हमले में मारे गए, ने कहा:
“हमारा सब कुछ खत्म हो गया था। लेकिन आज जब सरकार ने हमारे लिए रोजगार का ऐलान किया, तो उम्मीद जगी है कि हम फिर से अपनी जिंदगी शुरू कर पाएंगे।”
राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का समर्थन
इस फैसले की सराहना करते हुए कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने कहा कि यह कदम बाकी राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है। सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोग हमेशा जोखिम में रहते हैं, और ऐसे में उनकी सुरक्षा व पुनर्वास पर प्राथमिकता से काम होना चाहिए।
आगे क्या? पुनर्निर्माण और निगरानी की योजना
सरकार अब सीमावर्ती गांवों में रडार आधारित निगरानी सिस्टम, सीसीटीवी कैमरा, और फायर-सेफ बंकरों के निर्माण पर भी विचार कर रही है। एल-जी कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, इन इलाकों के लिए एक दीर्घकालिक सुरक्षा नीति बनाई जा रही है जिसमें तकनीक की मदद से पहले ही खतरे को भांप कर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा सके।
उम्मीद की एक किरण
पाकिस्तान की गोलाबारी ने एक बार फिर निर्दोष नागरिकों की जान ले ली। लेकिन एल-जी मनोज सिन्हा द्वारा किया गया यह नौकरी का ऐलान उन परिवारों के लिए नई उम्मीद की किरण बनकर आया है जो अपने प्रियजनों को खो चुके हैं।
जहां एक ओर यह कदम मानवीय दृष्टिकोण से बेहद जरूरी था, वहीं यह सरकार के “सबका साथ, सबका विकास” के वादे को भी मजबूत करता है। आने वाले समय में अगर इस तरह के फैसलों को और व्यापक रूप दिया जाए, तो सीमावर्ती क्षेत्रों के लोग खुद को असहाय नहीं बल्कि सरकार के संरक्षित नागरिक महसूस करेंगे।
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