वन विभाग का बचाव अभियान
जसाधार वन विभाग की टीम ने तुरंत स्थिति का आकलन किया और बचाव कार्य शुरू किया। तेंदुए को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए विशेष सावधानी बरतनी थी, ताकि न तो जानवर को चोट पहुंचे और न ही बचाव दल को कोई खतरा हो। टीम ने रस्सियों, पिंजरे और अन्य उपकरणों का उपयोग कर एक रणनीति अपनाई। कुएं की गहराई और तेंदुए की स्थिति को ध्यान में रखते हुए, बचाव कार्य में कई घंटों की कड़ी मशक्कत लगी।

चुनौतियां और समाधान
बचाव कार्य के दौरान कई चुनौतियां सामने आईं। कुआं छोटा और गहरा था, जिसके कारण तेंदुए को बाहर निकालना आसान नहीं था। इसके अलावा, तेंदुए का तनावग्रस्त होना भी एक जोखिम था। वन विभाग ने स्थानीय लोगों से भीड़ को नियंत्रित करने में सहयोग मांगा, ताकि तेंदुआ और अधिक घबरा न जाए। विशेषज्ञों की मदद से तेंदुए को शांत करने के लिए उपयुक्त उपाय किए गए, और अंततः उसे पिंजरे में सुरक्षित बंद कर लिया गया।
Leopard rescue Gir Garhda: वन विभाग की प्रशंसा
अंबाडा गांव के लोग वन विभाग के इस त्वरित और प्रभावी कार्य से बेहद प्रभावित हुए। बचाव अभियान की सफलता के बाद, ग्रामीणों ने वन अधिकारियों की मेहनत और समर्पण की सराहना की। कई ग्रामीणों ने इसे एक प्रेरणादायक उदाहरण बताया, जो वन्यजीव संरक्षण और मानव-जानवर सह-अस्तित्व को बढ़ावा देता है। इस घटना ने ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति विश्वास को और मजबूत किया।
ग्रामीणों को प्रशिक्षण
बचाव अभियान के बाद, जसाधार वन विभाग ने अंबाडा गांव के किसानों और ग्रामीणों के लिए एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में वन अधिकारियों ने बताया कि कुएं में गिरे जंगली जानवरों को कैसे सुरक्षित बचाया जा सकता है। उन्होंने ग्रामीणों को सलाह दी कि ऐसी स्थिति में तुरंत वन विभाग को सूचित करें और स्वयं जोखिम न लें। इसके अलावा, खुले कुओं को ढकने और जंगली जानवरों के लिए सुरक्षित आवास सुनिश्चित करने के उपायों पर भी चर्चा की गई।
विशाल चौहान की रिपोर्ट
