धार्मिक परंपराओं का आध्यात्मिक आधार
Left hand offering in Hinduism: हिंदू धर्म में हर परंपरा का कोई न कोई गहरा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पक्ष होता है। पूजा-पाठ और धार्मिक आयोजनों में अपनाई जाने वाली हर विधि किसी न किसी आस्था, संयम और शुद्धता से जुड़ी होती है। ऐसा ही एक नियम है कि भगवान को प्रसाद चढ़ाते समय या किसी से लेते समय बाएं हाथ का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। यह केवल परंपरा नहीं, बल्कि आंतरिक शुद्धता और सम्मान का प्रतीक भी है।
दाएं हाथ का धार्मिक महत्व
दायां हाथ हिंदू धर्म में शुभ कार्यों, कर्म और धर्म का प्रतीक माना गया है। चाहे दीप जलाना हो, पूजा की थाली अर्पित करनी हो या फिर प्रसाद देना–लेना हो, इन सभी में दाएं हाथ का उपयोग करने की परंपरा रही है। मान्यता है कि दाएं हाथ से किए गए कार्यों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो आध्यात्मिक संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है।
read more: 26 May 2025, मेष से मीन तक जानें अपना दिन | daily horoscope”
बाएं हाथ से क्यों मना किया गया है?
बायां हाथ आमतौर पर शारीरिक, निजी और सांसारिक कार्यों के लिए प्रयुक्त होता है जैसे भोजन करना, वस्त्र पहनना या अन्य घरेलू कार्य। इस कारण इसे धार्मिक कार्यों में अशुद्ध माना गया है। बाएं हाथ से प्रसाद चढ़ाना या लेना भगवान के प्रति श्रद्धा और पवित्रता के भाव में कमी का संकेत माना जाता है।
पुराणों और ग्रंथों में उल्लेख
धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में भी यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि भगवान को कुछ भी अर्पित करते समय शरीर, मन और कर्म तीनों की पवित्रता आवश्यक होती है। दाएं हाथ का उपयोग न केवल एक परंपरा है, बल्कि यह हमारी भक्ति, समर्पण और अनुशासन का भी प्रतीक है। यह ध्यान रखना आत्मिक जागरूकता को बढ़ावा देता है।
परंपरा में आस्था और व्यवहार का संतुलन
Left hand offering in Hinduism: आज के समय में जब कई परंपराओं को केवल रस्म मान लिया गया है, तब भी ऐसी धार्मिक मान्यताएं हमें हमारी संस्कृति की गहराई से जोड़ती हैं। अगली बार जब आप मंदिर जाएं या किसी धार्मिक आयोजन में भाग लें, तो प्रसाद हमेशा दाएं हाथ से चढ़ाएं और लें। यह न सिर्फ धार्मिक मर्यादा का पालन है, बल्कि आपके श्रद्धा भाव की सच्ची अभिव्यक्ति भी है।
read more: UCC पर CM धामी की बड़ी पेशकश, चार महीने में मिले 1.5 लाख से अधिक आवेदन
