Laxman Shivarama Resigns BCCI Commentary: पूर्व भारतीय क्रिकेटर और दिग्गज कमेंटेटर लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने कमेंट्री पैनल छोड़ने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने 20 मार्च शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के एक्स पर पोस्ट करते हुए कमेंट्री से संन्यास लेने का ऐलान किया।
‘अहम मौकों से रखा गया दूर’
60 वर्षीय शिवरामकृष्णन ने अपने पोस्ट में लिखा कि- ’23 साल के लंबे कमेंट्री करियर के दौरान उन्हें टॉस और प्रेजेंटेशन जैसे महत्वपूर्ण अवसरों के लिए कभी प्राथमिकता नहीं दी गई। इस वजह से वो निराश थे।’
पूर्व लेग स्पिनर ने लिखा कि- ‘नए कमेंटेटरों को मौके मिलते रहे, जबकि उन्हें लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया।’

शिवरामकृष्णन ने यह भी कहा कि-
‘उनके रिटायरमेंट के पीछे TV प्रोडक्शन से जुड़ी एक बड़ी कहानी है, जो जल्द सामने आएगी। एक यूजर द्वारा रंगभेद का मुद्दा उठाने पर उन्होंने इसे सही ठहराया, जिससे विवाद और गहरा गया है।’
उन्होंने कहा कि-
‘पिछले 23 वर्षों से मुझे टॉस और पुरस्कार वितरण समारोह के लिए नहीं भेजा गया। जबकि नए लोग पिच रिपोर्ट, टॉस और पुरस्कार वितरण समारोह के लिए भेजे जाते रहे। मुझे उस समय भी नहीं भेजा गया जब रवि शास्त्री कोचिंग कर रहे थे, तो इसका मतलब क्या हो सकता है।’

शिवरामकृष्णन ने आगे कहा कि-
‘BCCI के अधिकार रखने वाली कंपनी का क्या हाल होता है कोई भी इसका अंदाजा लगा सकता है। मेरा संन्यास लेना कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन टीवी प्रोडक्शन की एक नई कहानी सामने आ रही है। जल्द ही आपके सामने पूरी तस्वीर स्पष्ट हो जाएगी।’
एक यूजर ने पूछा कि- क्या उनकी त्वचा का रंग कोई मुद्दा है?
शिवरामकृष्णन ने जवाब दिया, ‘आप सही हैं। रंगभेद।’
20 साल से ज्यादा का कमेंट्री करियर
साल 2000 से शिवरामकृष्णन कमेंट्री कर रहे थे और अपनी बेबाक राय के लिए जाने जाते थे। वे International Cricket Council (ICC) की क्रिकेट कमेटी में खिलाड़ी प्रतिनिधि भी रह चुके हैं।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर
शिवरामकृष्णन ने साल 1983 से 1986 के बीच भारत के लिए 9 टेस्ट और 16 वनडे मैच खेले। साल 1984 में इंग्लैंड के खिलाफ एक मैच में 12 विकेट लेकर चर्चाओं में आए। साल 1985 में ऑस्ट्रेलिया में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में फाइनल मैच में पाकिस्तान के खिलाफ शानदार गेंदबाजी करते हुए टीम की जीत में योगदान दिया।

लक्ष्मण शिवरामकृष्णन कौन हैं?
साल 1980 के दशक में महज 17 साल की उम्र में उन्होंने अपनी लेग स्पिन, गूगली और टॉप स्पिन से क्रिकेट जगत में पहचान बनाई। वे 1985 में ऑस्ट्रेलिया में आयोजित वर्ल्ड चैंपियनशिप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे।
1997-98 में जब ऑस्ट्रेलिया टीम भारत दौरे पर आई थी, तब सचिन तेंदुलकर ने शेन वॉर्न की चुनौती से निपटने के लिए उनसे मदद ली थी।
हालांकि उनका अंतरराष्ट्रीय करियर लंबा नहीं चला, लेकिन कमेंटेटर के रूप में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।
