जानिए क्यों बदल रहा है मौसम का मिजाज
late winter weather forecast: देश में इस बार ठंड का इंतजार थोड़ा लंबा होने वाला है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने साफ संकेत दिए हैं कि कड़ाके की सर्दी देर से दस्तक देगी। नवंबर में जहां दिन के तापमान में गिरावट देखने को मिलेगी, वहीं रातें सामान्य से गर्म रहेंगी।
यह जानकारी IMD के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने शुक्रवार को एक ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस में साझा की। उन्होंने कहा कि मौसमी पैटर्न में यह बदलाव ‘ला नीना प्रभाव’ की देरी के कारण हो रहा है।
late winter weather forecast: ठंड क्यों देर से आएगी? वजह है ‘ला नीना’
‘ला नीना’ एक महासागरीय मौसम प्रणाली है जो प्रशांत महासागर के तापमान को प्रभावित करती है। इसमें समुद्र का पानी सामान्य से ठंडा हो जाता है, जिससे दुनिया के कई हिस्सों में सर्दी और बारिश के पैटर्न बदल जाते हैं।
मौसम विभाग के मुताबिक, इस बार ला नीना प्रभाव कमजोर है और दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 तक ही पूरी तरह सक्रिय हो पाएगा। यही कारण है कि फिलहाल ठंडी हवाएं उत्तर भारत तक नहीं पहुंच पा रहीं। महापात्र ने बताया, “देश के ज्यादातर इलाकों में नवंबर में दिन का तापमान सामान्य से नीचे रह सकता है, लेकिन रातें अपेक्षाकृत गर्म महसूस होंगी।”
नवंबर में फिर से बरसात की तैयारी करें
IMD का अनुमान है कि नवंबर में सामान्य से ज्यादा बारिश देखने को मिल सकती है। विशेष रूप से मध्य भारत, पूर्वोत्तर राज्यों और दक्षिणी प्रायद्वीप के कुछ हिस्सों में बारिश की संभावना बनी हुई है।
हालांकि, उत्तर-पश्चिम भारत जैसे राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में बारिश कम रहने की संभावना है। महापात्र ने बताया कि अक्टूबर में भी बारिश सामान्य से 49% ज्यादा हुई थी। देशभर में 112.1 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई, जो 2001 के बाद दूसरा सबसे ज्यादा आंकड़ा है।
late winter weather forecast: कैसा रहेगा तापमान?
- दिन का तापमान: देश के कई हिस्सों में सामान्य से नीचे रहेगा, यानी दिन हल्के ठंडे रहेंगे।
- रात का तापमान: सामान्य से ऊपर रहेगा, यानी सुबह और रात की ठंड कम महसूस होगी।
- उत्तर भारत: पहाड़ी और तराई क्षेत्रों में ठंडी हवाएं देर से पहुंचेंगी।
- पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत: यहां तापमान में हल्की वृद्धि देखी जा सकती है।
IMD का कहना है कि इस बार तापमान में यह असंतुलन जलवायु परिवर्तन का भी परिणाम है।
जलवायु विशेषज्ञ क्या कहते हैं
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में मौसम का चक्र लगातार असामान्य होता जा रहा है। कभी मानसून देर से आता है, तो कभी सर्दी अचानक बढ़ जाती है। यह सब ग्लोबल वार्मिंग और समुद्री तापमान में उतार-चढ़ाव का असर है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार नवंबर की बारिश खेती और रबी फसलों के लिए फायदेमंद हो सकती है, लेकिन अगर यह अधिक दिनों तक चली तो कटाई पर असर भी डाल सकती है।
क्या अब दिसंबर में पड़ेगी असली ठंड?
IMD के शुरुआती अनुमानों के अनुसार, दिसंबर के दूसरे हफ्ते से सर्दी की असली शुरुआत हो सकती है। उत्तर भारत, खासकर जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में बर्फबारी के बाद मैदानी इलाकों में तापमान में तेज गिरावट आने की संभावना है। लेकिन फिलहाल नवंबर का महीना “अध-सर्द” रहेगा यानी न पूरी तरह गर्म, न पूरी तरह ठंडा।
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