सावन के अंतिम सोमवार का महत्व
Last Monday of Sawan Significance: पौराणिक मान्यता है कि सावन मास में भगवान शिव पृथ्वी पर सपरिवार विचरण करते हैं और अपने भक्तों की भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें मनचाहा वरदान देते हैं। अंतिम सोमवार पर व्रत-पूजन करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह दिन विशेष रूप से सफलता, वैवाहिक जीवन में सुख, स्वास्थ्य और आर्थिक समृद्धि के लिए शुभ माना जाता है।
ऐसा भी कहा जाता है कि जो जातक श्रावण मास के अंतिम सोमवार को श्रद्धा और विधिपूर्वक व्रत रखते हैं, उनके जीवन से सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं और भोलेनाथ उनका जीवन मंगलमय कर देते हैं।
शिव को प्रसन्न करने को अंतिम अवसर
सावन के पवित्र माह में भागवान शिव की अर्चना का विशेष महत्व बताया जाता है आने वाली 9 अगस्त को श्रावण मास समाप्त होने जा रहा है। वैसे तो भगवान शिव ‘’सदा बसंतम्’’ कहलाते है यानी इनकी जब भी सच्चे मन से आराधना करो शिव त्वरित प्रसन्न हो जाते है इसलिए भोले बाबा को ‘आशुतोष’ कहते है। लेकिन फिर भी सावन की अपनी विशेषता है। इस आखरी श्रावन सोमवार को शिव की विशेष आराधना कैसे करें, जिससे शिव अपने परिवार सहित आप पर कृपा बनाए रखें।

अंतिम व्रत का महत्व
Last Monday of Sawan Significance: अंतिम सोमवार पर व्रत-पूजन करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह दिन विशेष रूप से सफलता, वैवाहिक जीवन में सुख, स्वास्थ्य और आर्थिक समृद्धि के लिए शुभ माना जाता है। ऐसा भी कहा जाता है कि जो जातक श्रावण मास के अंतिम सोमवार को श्रद्धा और विधिपूर्वक व्रत रखते हैं, उनके जीवन से सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं और भोलेनाथ उनका जीवन मंगलमय कर देते हैं।
सावन में कैसे करें शिव को चिन्तन
• सबसे पहले प्रात: उठकर स्नान करें एवं स्वच्छ वस्त्र पहन कर शिव जी का ध्यान करें
• शुद्ध मिट्टी से भगवान की शिवलिंग तैयार करें फिर पूजन सामग्री अर्पित करें ।
• जल, दूध, दही, शहद, घी, और गंगाजल से अभिषेक करें ।
• साथ ही बेलपत्र, धतूरा, और भांग भी अर्पित करें।
• सावन के दौरान पूजा के समय पीले वस्त्र धारण करना चाहिए।
• पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” और “ॐ तत्पुरुषाय विद्महे, महादेवाय धीमहि, तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्” जैसे मंत्रों का जाप करते रहें ।
• आरती के बाद भगवान शिव के शिवलिंग को कुछ समय के लिये रहने दें ।
• संध्या काल से पहले भगवान को प्रणाम कर, गलती के लिए क्षमा मागें और पास की नदी या पवित्र तालाव में शिवलिंग विसर्जन करें
