अंधकार और अज्ञानता दूर करने का प्रतीक है दीपक
रोशनी का त्योहार दिवाली 31 अक्टूबर इसी महीने में मनाया जाता है। धार्मिक दृष्टि से दीपक का प्रकाश देवी-देवताओं को बहुत प्रिय है और इस प्रकाश से सकारात्मकता बढ़ती है। जीवन प्रबंधन की दृष्टि से दीपक अंधकार और अज्ञानता को दूर करने का प्रतीक है।
जानिए दीपक से जुड़ी खास मान्यताएं
ध्यान रखें कि पूजा के दौरान कभी भी टूटा हुआ दीपक नहीं जलाना चाहिए। टूटी हुई वस्तुओं का उपयोग अनुष्ठानों में नहीं किया जाता है।
सुबह-शाम घर में दीपक जलाने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। आमतौर पर पूजा के दौरान घी का दीपक जलाना चाहिए। घी को पंचामृत यानी पांच अमृत में से एक माना जाता है। अगर गाय के दूध से घी बनाया जाए तो यह बहुत शुभ होता है।
गाय के घी में सूक्ष्म कीटाणुओं को खत्म करने का गुण होता है। जब गाय के घी का दीपक जलाया जाता है तो इसका धुआं घर के वातावरण को शुद्ध करता है। दीपक जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
जब कोई वस्तु आग में जलती है, तो वह छोटे-छोटे अदृश्य टुकड़ों में टूट जाती है और वायुमंडल में फैल जाती है। इसलिए आग से घी घर में फैलता है और वातावरण को शुद्ध करता है।
ध्यान रखें कि देवी-देवताओं को घी का दीपक अपने बाएं हाथ की ओर रखना चाहिए। तेल के दीपक को दाईं ओर रखा जाना चाहिए। पूजा करते समय दीपक नहीं जलाना चाहिए।
दीपक के लिए सफेद रूनी वैट का उपयोग किया जाना चाहिए। अगर रूनी वाट उपलब्ध नहीं है तो आप लाल धागे का कटोरा बनाकर दीपक जला सकते हैं।
मान्यता है कि दीपक जलाने से सकारात्मकता बढ़ती है और जहां दीपक जलता है वहां देवी-देवताओं का वास होता है। इसी वजह से बिना दीपक जलाए सभी देवी-देवताओं की पूजा पूजा नहीं मानी जाती है।
दीपक का प्रकाश देवी-देवताओं को बहुत प्रिय है। दीपक हमें संदेश देता है कि हमें अज्ञानता के अंधकार को दूर कर अपने जीवन में ज्ञान का प्रकाश फैलाना चाहिए, तभी हमें देवी-देवताओं का आशीर्वाद यानी सफलता मिलेगी।
