प्रदर्शनकारी छात्रों और युवाओं की पुलिस तथा सुरक्षा बलों से झड़प हो गई। इस दौरान छात्रों ने भाजपा कार्यालय में आग लगा दी, पुलिस पर पत्थरबाजी की और CRPF की एक गाड़ी को आग के हवाले कर दिया। यह घटना लद्दाख में हाल के वर्षों में सबसे बड़ी हिंसक घटना मानी जा रही है। प्रदर्शनकारी पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में सड़कों पर उतरे थे, जो पिछले 15 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। मांगें पूरी न होने के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने लेह में बंद का आह्वान किया था और वांगचुक के समर्थन में एक बड़ी रैली निकाली गई।
क्यों हो रही हिंसा?
लद्दाख को 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। शुरू में इस फैसले का स्वागत किया गया था, क्योंकि लद्दाखवासी जम्मू-कश्मीर से अलग होकर अपनी अलग पहचान चाहते थे। हालांकि, समय बीतने के साथ यहां के लोगों में असंतोष बढ़ता गया। उन्हें लगा कि बिना विधानसभा के केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा उनके अधिकारों को सीमित कर रहा है। पर्यावरणीय संवेदनशील क्षेत्र होने के कारण, यहां बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा परियोजनाओं और औद्योगिक विकास की योजनाओं से स्थानीय लोगों की जमीनें और पारंपरिक जीवनशैली खतरे में पड़ गई है।
छात्रों की मांगे

सोनम वांगचुक के समर्थ में विरोध
सोनम वांगचुक, जो एक प्रसिद्ध इनोवेटर और क्लाइमेट एक्टिविस्ट हैं, ने इन मुद्दों को उठाया है। वे पिछले 15 दिनों से लेह में भूख हड़ताल पर हैं। उनकी हड़ताल का उद्देश्य सरकार का ध्यान लद्दाख की मांगों की ओर आकर्षित करना है। वांगचुक ने कहा है कि लद्दाख के सैनिकों और नागरिकों ने देश की रक्षा में अपना जीवन बलिदान किया है, लेकिन अब कॉर्पोरेट कंपनियां यहां की चरागाह भूमि पर कब्जा कर रही हैं। इससे न केवल पर्यावरण प्रभावित हो रहा है, बल्कि स्थानीय आदिवासी समुदायों की आजीविका भी खतरे में है।

THANK YOU ARUNACHAL
For raising the voice of Ladakh. You have raised the voice not just of Ladakh but of all the tribal cultures and fragile ecologies of Himalayas.
DAY 14 OF LADAKH ANSHAN #SaveLadakh #SaveHimalayas #BharatBachao #PariyavaranBachao pic.twitter.com/P4wLf60UUZ— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) September 23, 2025
Ladakh Statehood Protests: युवाओं का हिंसक रूप
प्रदर्शन में मुख्य रूप से छात्र और युवा शामिल थे, जो वांगचुक के समर्थन में सड़कों पर उतरे। लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (KDA) जैसे संगठनों के नेतृत्व में यह आंदोलन चल रहा है। युवाओं ने बंद के दौरान रैली निकाली, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए। हालांकि, दोपहर में स्थिति बिगड़ गई जब कुछ युवाओं ने हिंसक रूप धारण कर लिया।
#breakingnews: जलता लद्दाख, जिम्मेदार कौन ? #LadakhProtest #ladakh #lehladakh #leh #studentprotest पूर्ण राज्य, सोनम वांगचुक #ladakh #sonamwangchuk @jtnladakh @Wangchuk66 @BJP4Ladakh @PMOIndia @AmitShah pic.twitter.com/4tg0jLSU40
— Nation Mirror (@nationmirror) September 24, 2025
हिंसा कैसे भड़की
बुधवार सुबह से लेह में बंद का पालन हो रहा था। दुकानें बंद थीं और सड़कें सुनसान। वांगचुक की हड़ताल के साथ दो अन्य हड़ताली अस्पताल में भर्ती हो गए, जिससे प्रदर्शनकारियों में गुस्सा भड़क गया। रैली के दौरान प्रदर्शनकारी भाजपा कार्यालय की ओर बढ़े और वहां पहुंचकर पत्थरबाजी शुरू कर दी। पुलिस ने रोकने की कोशिश की, लेकिन स्थिति बेकाबू हो गई। प्रदर्शनकारियों ने भाजपा कार्यालय में आग लगा दी और एक सीआरपीएफ वाहन को जला दिया। पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज किया। कई प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी घायल हुए। अधिकारियों का कहना है कि यह हिंसा अचानक भड़की और इसे नियंत्रित करने में समय लगा।

वांगचुक ने अनशन तोड़ा
हिंसा के बाद सोनम वांगचुक ने अनशन तोड़ दिया और कहा –
यह लद्दाख के लिए दुख का दिन है। हम 5 साल से शांति के रास्ते पर चल रहे थे। अनशन किया, इतना ही नहीं लेह से दिल्ली तक पैदल चलकर गए। आज हम शांति के पैगाम को असफल होते हुए देख रहे हैं। लद्दाख में हिंसा, गोलीबारी और आगजनी हो रही है। मैं युवा पीढ़ी से अपील करता हूं कि इसे रोक दें, ये लद्दाख के मुद्दे का समर्थन नहीं है। इससे स्थिति और गंभीर होती जाएगी। मैं अपील करता हूं प्रशासन गोलाबारी रोक दें। हम अपना अनशन तोड़ रहे हैं, प्रदर्शन रोक रहे हैं।
VERY SAD EVENTS IN LEH
My message of peaceful path failed today. I appeal to youth to please stop this nonsense. This only damages our cause.#LadakhAnshan pic.twitter.com/CzTNHoUkoC— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) September 24, 2025
अनुच्छेद 370 हटने के बाद विरोध की शुरुआत
Ladakh Statehood Protests: अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया, लेकिन बिना विधानसभा के। शुरू में खुशी थी, लेकिन जल्द ही असंतोष उभरा। 2020 से ही लेह और कारगिल में मांगें उठने लगीं। 2023-24 में आंदोलन तेज हुआ, जब बड़े सौर परियोजनाओं से चरागाह भूमि प्रभावित हुई। वांगचुक ने 2024 में दिल्ली तक पदयात्रा की और अब 2025 में फिर हड़ताल शुरू की। सरकार ने कई दौर की बातचीत की, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।
