labdhi jain diksha rohtak 2025 : 5 जून को होगी दीक्षा
labdhi jain diksha rohtak 2025 : हर लड़की का सपना होता है कि वह एक दिन दुल्हन बने, घर में ढोल बजे, मेहंदी लगे, मंगलगीत गाए जाएं… पर हर लड़की की मंज़िल शादी नहीं होती। कुछ रास्ते मोक्ष की ओर भी जाते हैं और ऐसा ही पवित्र निर्णय लिया है लब्धि जैन ने।
👰 दुल्हन जैसी सजधज, पर जीवन का दूसरा विवाह आत्मा से!
रोहतक में इन दिनों शादी जैसा माहौल है – लेकिन यहां बारात नहीं आएगी, बल्कि साध्वी बनने की राह पर चलने वाली एक युवती को विदाई दी जा रही है।
लब्धि जैन, सोनीपत के गांव बिबलां की निवासी, 5 जून को साध्वी बनने जा रही हैं। इससे पहले उनके लिए बिलकुल विवाह जैसी रस्में निभाई जा रही हैं।
🎉 शादी की हर रस्म निभाई जा रही है
- हल्दी, तेल चढ़ाना, मेहंदी, बान की रस्म, मंगल गीत- सब कुछ ठीक उसी तरह किया जा रहा है जैसे एक नई दुल्हन की शादी में होता है।
- श्रद्धालु उन्हें घर बुलाकर ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत करते हैं।
- वे लब्धि को लाल जोड़ा, चूड़ियां, पायल, बाली, टीका पहनाकर सजाते हैं – जैसे बेटी को विदा कर रहे हों।
📸 दृश्य बिलकुल विवाह जैसे:
- ढोल की थाप पर नाचते लोग
- मंगल गीत गाती महिलाएं
- लब्धि को घेरे श्रद्धालु, आंखों में आंसू पर गर्व के
🔱 क्यों होती हैं साध्वी दीक्षा से पहले ये रस्में?
जैन परंपरा में साध्वी दीक्षा को “आध्यात्मिक विवाह” माना जाता है। यह आत्मा और संयम के बीच का बंधन होता है।
इसलिए लड़की को उन सभी सांसारिक सुखों का अनुभव कराया जाता है, जिससे वह फिर कभी मोह न करे।

🗓️ 5 जून को दीक्षा, पर उससे पहले…
- 4 जून: मेहंदी की रस्म
- 5 जून:
- सुबह: मंगल कलश यात्रा, रथयात्रा
- स्थान: महाराजा अग्रसेन ऑडिटोरियम, रोहतक
- समारोह: दीक्षा मंत्र ग्रहण कर साध्वी लब्धि मुनि बनेंगी
🙏 समाज में प्रेरणा का स्रोत बनीं लब्धि
आज के दौर में जहां युवा आकर्षण और ऐशो-आराम की ओर भागते हैं, वहीं लब्धि जैन जैसी युवतियां त्याग, संयम और मोक्ष का मार्ग चुन रही हैं।
उनका यह निर्णय हजारों युवाओं के लिए एक प्रेरणा बन रहा है।
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