IOC Bans Transgender Women: अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) ने 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस ओलंपिक से पहले बड़ा ऐलान कर दिया है। 26 मार्च गुरुवार को IOC के मुताबिक, अब ओलंपिक में महिला कैटेगरी के इवेंट्स में कोई ट्रांसजेंडर हिस्सा नहीं ले पाएंगी।
मैच के पहले होगा जीन टेस्ट!
नई नीति के अनुसार, अब जो बयोलॉजिकल फीमेल्स है, उन्हें ही वुमन कैटेगरी में खेलने की अनुमति दी जाएगी। अब मैच खेलने से पहले एक बार जीन टेस्ट (SRY जीन स्क्रीनिंग) करना जरुरी होगा, जिससे जेंडर की पुष्टि की जाएगी।
बता दें कि, यह टेस्ट थूक, गाल के स्वैब या ब्लड सैंपल से किया जा सकता है।

IOC का नया फैसला
IOC ने नए नियम का ऐलान करते हुए कहा कि, ‘ओलंपिक खेलों या किसी अन्य IOC प्रतियोगिता में व्यक्तिगत और टीम खेलों सहित किसी भी महिला वर्ग की स्पर्धा में भाग लेने की पात्रता अब केवल बायोलोजिकल महिलाओं तक ही सीमित है।’
यह स्पष्ट नहीं है कि ओलंपिक स्तर पर कोई ट्रांसजेंडर महिलाएं प्रतिस्पर्धा कर रही हैं या नहीं।
आगे कहा कि-
IOC ने कहा कि, ‘जुलाई 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस ओलंपिक से लागू होने वाली पात्रता नीति महिला वर्ग में निष्पक्षता, सुरक्षा और अखंडता सुनिश्चित करेगी।’
रिसर्च के मुताबिक, जन्म से पुरुष होने के कारण एथलीट को स्ट्रेंथ (ताकत), एंड्योरेंस (सहनशक्ति) और पावर आधारित खेलों में शारीरिक रूप से बढ़त यानी एडवांटेज मिलता है। संस्था का मानना है कि, हार्मोनल बदलावों के बावजूद यह शारीरिक अंतर पूरी तरह खत्म नहीं होते।
आईओसी ने आगे कहा-
‘यह नीति पूर्वव्यापी नहीं है और किसी भी जमीनी स्तर या मनोरंजक खेल कार्यक्रमों पर लागू नहीं होगी।’

IOC अध्यक्ष कर्स्टी कोवेंट्री का बयान
अध्यक्ष कर्स्टी कोवेंट्री ने कहा कि- ‘यह अहम फैसला इसलिए लिया गया है, क्योंकि ‘बायोलॉजिकल तौर पर पुरुष एथलीटों का महिलाओं की कैटेगरी में मुक़ाबला करना सही नहीं होगा।’
कोवेंट्री ने आगे कहा कि-
‘यह फैसला सभी व्यक्तिगत और टीम स्पोर्ट्स पर लागू होगा है। यह विज्ञान पर आधारित है और महिलाओं के खेलों की निष्पक्षता और सुरक्षा को सुनिश्चित करेगा। एक पूर्व एथलीट के तौर पर, मेरा पूरी शिद्दत से यह मानना है कि सभी ओलंपियनों को निष्पक्ष प्रतिस्पर्धाओं में भाग लेने का अधिकार है।’
