वो गन नहीं, एक संकल्प थी जब भुज की ज़मीन पर गूंजे 300 गोलों की कहानी
l70 air defence gun india: भुज की धरती पर दशहरे की सुबह कुछ अलग थी। यहां न सिर्फ रावण का पुतला जलाया गया, बल्कि भारत की रक्षा संकल्पना का जीवंत रूप—L70 एयर डिफेंस गन—शस्त्र पूजा के केंद्र में थी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की आंखों में सम्मान था, और सैनिकों के चेहरों पर गर्व।
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लेकिन यह पूजा सिर्फ एक परंपरा नहीं थी। यह उस ताकत की पूजा थी जिसने हाल ही में पाकिस्तान के ड्रोन को उसकी ही ज़मीन पर ज़लील किया था।
L70 गन: 60 साल पुरानी लेकिन आज भी जवान
l70 air defence gun india: आप सोचेंगे—“क्या एक पुरानी गन आज की हाईटेक दुनिया में कारगर हो सकती है? तो जवाब है हां, बिल्कुल। Bofors द्वारा बनाई गई L70 गन एक मिनट में 300 गोलों की बारिश करती है। यह मशीन न केवल टारगेट को 3.5 किलोमीटर दूर से भेद सकती है, बल्कि इसे आज के तकनीकी युग में अपग्रेड करके आधुनिक ड्रोन वॉरफेयर में तब्दील कर दिया गया है।
यही गन थी जिसने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तानी ड्रोन को आसमान से सीधा ज़मीन पर पटक दिया।
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ऑपरेशन सिंदूर: जब भारत ने खामोशी से दिया करारा जवाब
ऑपरेशन सिंदूर के बारे में ज्यादा कुछ मीडिया में नहीं आया, लेकिन जो सामने आया, वो काफी था—ड्रोन जले, पाकिस्तानी राडार सिस्टम फेल, और भारत की आकाश से ज़मीन तक की पकड़ मजबूत हुई। लेह से लेकर सर क्रीक तक, पाकिस्तान ने घुसपैठ की कोशिश की। मगर इस बार भारत चुप नहीं बैठा। जवाब सीधा, तेज और करारा था। इस ऑपरेशन ने साफ कर दिया कि भारत अब सिर्फ रक्षात्मक नीति नहीं अपनाएगा—हम हमला भी कर सकते हैं, और सफल भी होंगे।
l70 air defence gun india: सर क्रीक: 96 किलोमीटर की वो सच्चाई
सर क्रीक… एक नाम जो अधिकतर भारतीयों ने किताबों या न्यूज हेडलाइनों में सुना होगा। लेकिन इसकी हकीकत समझना ज़रूरी है। यह इलाका गुजरात और पाकिस्तान के सिंध के बीच की एक दलदली सीमा है, जहां जमीन नहीं, बल्कि विश्वास डगमगाता है। पाकिस्तान ने यहां अपनी मिलिट्री मौजूदगी बढ़ाई है।
राजनाथ सिंह ने साफ कहा
अगर सर क्रीक में हिमाकत हुई, तो इतिहास और भूगोल दोनों बदलेंगे।
ये सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि एक संदेश था—भारत अब प्रतीक्षा नहीं करता, तैयारी करता है।
l70 air defence gun india: शस्त्र पूजा: जब परंपरा और पराक्रम एक साथ खड़े होते हैं
दशहरे पर जब राजनाथ सिंह ने L70 गन के आगे दीया जलाया, तिलक किया, और सिर झुकाया—तो वो सिर्फ एक रिवाज नहीं था। वो उस भावना का प्रतीक था कि भारत शस्त्रों की पूजा करता है, लेकिन जब जरूरत हो, उन्हें चलाना भी जानता है। यह पूजा उस भरोसे की थी जो एक जवान अपने हथियार पर करता है। उस उम्मीद की थी जो एक देश अपने रक्षकों से रखता है
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