कुंभ वायरल गर्ल से जुड़े बहुचर्चित मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) की जांच में सामने आया है कि विवाह के समय पीड़िता नाबालिग थी। इस मामले में आरोपी फरमान खान के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और एट्रोसिटी एक्ट के तहत FIR दर्ज की गई है।
जांच में सामने आया उम्र का सच
आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य के नेतृत्व में जांच टीम ने महेश्वर अस्पताल के रिकॉर्ड की पड़ताल की। दस्तावेजों के अनुसार पीड़िता की जन्मतिथि 30 दिसंबर 2009 दर्ज है। 11 मार्च 2026 को केरलम में हुए विवाह के समय उसकी उम्र केवल 16 साल 2 माह थी, जो कानूनी रूप से नाबालिग श्रेणी में आती है।जांच में यह भी सामने आया कि विवाह के लिए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया गया। संबंधित दस्तावेज को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
संगठित नेटवर्क की जांच
मामले में फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले एक संभावित नेटवर्क की आशंका जताई जा रही है। नगर पालिका महेश्वर से जारी प्रमाण पत्र भी जांच के दायरे में है। पुलिस अब इस पूरे सिंडिकेट की तलाश में जुटी है और अन्य राज्यों से भी जानकारी एकत्र की जा रही है।
PFI कनेक्शन और विदेशी फंडिंग की आशंका
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने कुछ संगठनों की संभावित संलिप्तता का मुद्दा उठाया। आरोप है कि यह निकाह किसी बड़े एजेंडे का हिस्सा हो सकता है। जांच एजेंसियां इस मामले में विदेशी फंडिंग और संगठित गतिविधियों के एंगल से भी पड़ताल कर रही हैं।इसके अलावा, जानकारी मिली है कि आरोपी और पीड़िता पिछले तीन महीनों से अलग-अलग स्थानों पर ठहर रहे थे। आयोग इस केस को आदिवासी बच्चों की तस्करी के दृष्टिकोण से भी देख रहा है।
दो राज्यों के DGP दिल्ली तलब
मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने 22 अप्रैल 2026 को मध्य प्रदेश और केरलम के पुलिस महानिदेशकों (DGP) को दिल्ली मुख्यालय तलब किया है. दोनों राज्यों की पुलिस को हर तीन दिन में प्रगति रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
हर एंगल से जांच जारी
फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की जांच कई स्तरों पर कर रही है। इसमें मानव तस्करी, फर्जी दस्तावेज, संगठित नेटवर्क और अन्य संभावित कनेक्शन शामिल हैं. राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने स्पष्ट किया है कि आदिवासी पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए मामले की निगरानी लगातार जारी रहेगी।
