कुलगाम एनकाउंटर: आतंकवादियों का सफाया जारी
कुलगाम के गुड्डर जंगलों में सोमवार को शुरू हुआ एनकाउंटर अब भी जारी है। दूसरे दिन यानी मंगलवार को भी सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच जबरदस्त मुठभेड़ हो रही है। अब तक दो आतंकवादी मारे जा चुके हैं, लेकिन इलाके में छिपे अन्य आतंकवादियों की तलाश के लिए सेना का अभियान जारी है। इस संघर्ष में दुख की बात ये रही कि दो बहादुर जवान शहीद हो गए, जिन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपनी जान दी।

यह मुठभेड़ एक ऐसे समय पर हो रही है जब जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों की गतिविधियां बढ़ी हैं। कुलगाम के गुड्डर जंगलों में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के आतंकवादियों के छिपे होने की सूचना के बाद सेना, पुलिस और CRPF की एक जॉइंट टीम ने तलाशी अभियान शुरू किया था। इस अभियान का नाम ऑपरेशन गुड्डर रखा गया है।
आतंकवादियों की पहचान और उनके इरादे
दो आतंकवादियों की पहचान आमिर अहमद डार और रहमान भाई के रूप में की गई है। आमिर लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ था और सितंबर 2023 से सक्रिय था। वहीं, रहमान को पीर पंजाल रेंज में लश्कर का कमांडर माना जाता था। यह मुठभेड़ सेना के लिए एक कठिन परीक्षा साबित हो रही है, क्योंकि इन आतंकवादियों के पास अत्याधुनिक हथियार हैं और वे जंगलों का लाभ उठाकर छिपे हुए हैं।
जब एनकाउंटर और जटिल हो गया
आतंकवादियों ने तलाशी ले रहे जवानों पर गोलियां चलाईं, जिससे स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई। जवाबी फायरिंग में सेना के जवानों ने आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब दिया, लेकिन मुठभेड़ अब भी जारी है।
जम्मू में पाकिस्तान से घुसपैठ की कोशिश
कुलगाम में चल रहे ऑपरेशन के बीच, जम्मू के आरएस पुरा सेक्टर से भी एक और घुसपैठ की खबर आई। BSF जवानों ने सीमा पर एक पाकिस्तानी घुसपैठिए को गिरफ्तार किया। यह व्यक्ति पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का रहने वाला था और उसे इंटरनेशनल बॉर्डर पर गिरफ्तार किया गया। उसके पास से कुछ पाकिस्तानी करेंसी भी मिली है, जिससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि वह आतंकवादी गतिविधियों में शामिल हो सकता है।
एनकाउंटर में शहीद हुए जवानों का बलिदान
हमारे सैनिक अपनी जान की आहुति देकर देश की सुरक्षा करते हैं। कुलगाम एनकाउंटर में अब तक दो सैनिक शहीद हो चुके हैं। उनकी शहादत सिर्फ उनके परिवार के लिए नहीं, बल्कि पूरी देशवासियों के लिए गर्व की बात है। उनका बलिदान हमें यह याद दिलाता है कि भारत की सुरक्षा के लिए हमारे सैनिक दिन-रात संघर्ष कर रहे हैं।

यह हादसा हमें उन सभी शहीदों की याद दिलाता है, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। 13 अगस्त, 8 मई और 12 अप्रैल जैसे ऑपरेशनों में भी हमने अपने जवानों को खोया है, जिनकी वीरता और बलिदान कभी नहीं भूला जा सकता।
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