जंगलों में गोलियों की गूंज ऑपरेशन अखल की दास्तान
कभी-कभी देश की सबसे खामोश लड़ाइयाँ सबसे खतरनाक मोर्चों पर लड़ी जाती हैं न न्यूज चैनलों पर चीखती हैं, न ही वायरल वीडियो बनती हैं। जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले का अखल जंगल, पिछले 9 दिनों से ऐसी ही एक खामोश लेकिन जानलेवा जंग का मैदान बना हुआ है।

दो जवान… और वो आखिरी रेडियो कॉल
लांस नायक प्रितपाल सिंह और सिपाही हरमिंदर सिंह… शुक्रवार को घायल हुए थे, और शनिवार सुबह वो ज़िन्दगी की लड़ाई हार गए। उनके नाम सिर्फ शहीदों की लिस्ट में एक नंबर नहीं हैं उनके घरों में आज मातम पसरा है, मांओं की रसोई में चूल्हा नहीं जला, और बच्चों की आंखें सवालों से भरी हैं।
किसी ने कहा था “हर शहीद की चिट्ठी कभी लिखी नहीं जाती, बस उनकी बंदूकें बोल जाती हैं।”
ऑपरेशन अखल: 1 अगस्त से शुरू हुई एक खुफिया जंग
इस ऑपरेशन की शुरुआत 1 अगस्त की शाम एक गुप्त सूचना के बाद हुई। सुरक्षाबलों ने जैसे ही सर्च ऑपरेशन शुरू किया, आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग की। इसके बाद घना जंगल एक बार फिर बारूद की गंध से भर गया।
2 अगस्त को दो आतंकी मारे गए, जिनमें एक की पहचान पुलवामा के हारिस नजीर डार के रूप में हुई जो सी-कैटेगरी का आतंकी था और 14 वांटेड लोकल आतंकियों की लिस्ट में शामिल था।
स्मार्ट ऑपरेशन, हाई रिस्क
इस ऑपरेशन में सेना, CRPF, J&K पुलिस और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) एक साथ मोर्चा संभाल रहे हैं। जंगल इतना घना और दुर्गम है कि फायरिंग कब कहां से शुरू होगी, ये भी साफ नहीं होता।

अब तक 9 जवान घायल हो चुके हैं, और सुरक्षा बलों को अब भी लगता है कि कुछ आतंकी इन जंगलों में छिपे हो सकते हैं। ऐसे में हर पेड़ के पीछे खतरा है, हर खामोशी एक छलावा।
कुल मिलाकर 7 आतंकी ढेर 7 की तलाश अब भी बाकी
खुफिया एजेंसियों की लिस्ट में जिन 14 लोकल आतंकियों के नाम थे, उनमें से अब तक 7 मारे जा चुके हैं। 13 और 15 मई को शोपियां और पुलवामा में 6 आतंकी मारे गए थे। 28 जुलाई को ऑपरेशन महादेव में पहलगाम हमले के मास्टरमाइंड सुलेमान, अफगान और जिब्रान को मारा गया। और अब, हारिस डार की मौत के बाद ये गिनती 7 हो गई है। बाकी 7 की तलाश जारी है… और उनकी तलाश में हर दिन शहीदी का जोखिम भी साथ चलता है।
किश्तवाड़ में आतंकी नेटवर्क पर छापा
9 अगस्त को सुरक्षाबलों ने किश्तवाड़ में पाकिस्तान समर्थित आतंकी गुर्गों के नेटवर्क पर छापा मारा। आतंकियों को सपोर्ट देने वाले कुछ लोग पकड़े गए हैं। ये ऑपरेशन सिर्फ हथियार की लड़ाई नहीं नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने की जंग है।

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