राज्यपाल बोस बोले – बंगाल धार्मिक अहंकार को खत्म करेगा

कोलकाता। ब्रिगेड परेड ग्राउंड रविवार को उस समय आध्यात्मिक माहौल में डूब गया जब लाखों लोग ‘पंच लक्खो कोर्थे गीता पथ’ कार्यक्रम में सामूहिक गीता पाठ के लिए एकत्र हुए। विशाल मैदान भगवा वस्त्रों, धार्मिक ध्वजों और भक्तों की एकसाथ उठती आवाज़ों से गूंजता रहा।
कार्यक्रम का आयोजन सनातन संस्कृति संसद ने किया था, जिसमें भिक्षुओं, धार्मिक संस्थानों और कई प्रमुख आध्यात्मिक गुरुओं ने भाग लिया। श्रद्धालुओं ने भगवद गीता के पहले, नौवें और अठारहवें अध्यायों का सामूहिक रूप से पाठ किया।
राज्यपाल का संदेश बंगाल तैयार है
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस ने मंच से संबोधित करते हुए कहा कि राज्य को “धार्मिक अहंकार” से मुक्त होने की आवश्यकता है। उनका वक्तव्य हाल में मुर्शिदाबाद के बेलडांगा रेजीनगर इलाके में धार्मिक तनाव को लेकर एक अप्रत्यक्ष टिप्पणी माना गया, जहाँ टीएमसी के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर द्वारा विवादित मस्जिद की आधारशिला रखे जाने के बाद तनाव उत्पन्न हुआ था।
राज्यपाल ने भाषण में भाषा पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा हिंदी हमारी राष्ट्रीय भाषा है। अंग्रेजी हमारी मातृभाषा नहीं, बल्कि दाइमा की तरह है। दाइमा कभी मां की जगह नहीं ले सकती।
राजनीतिक और धार्मिक दोनों मोर्चों से उपस्थिति
केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार, विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी, पूर्व सांसद लॉकेट चटर्जी, विधायक अग्निमित्रा पाल और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य कार्यक्रम में मौजूद रहे और गीता पाठ में शामिल हुए। धार्मिक समुदाय से स्वामी प्रदीप्तानंद (कार्तिक महाराज), बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री, और अनेक मठों के भिक्षु भी उपस्थित थे।
प्रतिभागियों ने कहा आयोजन आध्यात्मिक
भीड़ में आए कई भक्तों ने कहा कि वे इसे राजनीतिक कार्यक्रम के रूप में नहीं देखते। पूर्व बर्धमान से आए देबराज रॉय ने कहा कि यह आध्यात्मिक विरासत का सम्मान और एकता का प्रदर्शन है। विहिप से जुड़े सम्राट सरकार ने भी कहा कि उनकी भागीदारी सिर्फ धार्मिक अनुभव के लिए है, न कि किसी राजनीतिक उद्देश्य से।

आयोजकों ने कहा कि इस सामूहिक गीता पाठ का मकसद आध्यात्मिक शांति और बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को उजागर करना है। कार्तिक महाराज ने कहा गीता सिर्फ हिंदुओं की नहीं है, यह 140 करोड़ भारतीयों के लिए मार्गदर्शक है। आज के बंटे हुए माहौल में साधना स्थिरता और दिशा देती है।
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