क्या हो रहा है कोलकाता में?
कोलकाता में मूसलधार बारिश ने सिर्फ शहर को नहीं, बल्कि लोगों की ज़िंदगियों को भी हिला कर रख दिया है। सोमवार रात से लेकर मंगलवार सुबह तक शहर में इतनी जोरदार बारिश हुई कि पूरा कोलकाता जलमग्न हो गया। न सिर्फ सड़कों पर बल्कि घरों में भी पानी घुस चुका है।

आप सोचिए, जिन घरों में पूजा की तैयारियां हो रही थीं, वहां पूजा पंडाल डूब गए। जिन लोगों ने खुशियों के लिए दिन गिन रहे थे, आज वो बाढ़ के पानी में फंसे हैं। ना रास्ते हैं, ना बिजली की सुविधा, और ना ही मेट्रो से आना-जाना संभव है।
लेकिन इन मुश्किलों के बीच एक और दिल तोड़ने वाली खबर आई है – बारिश के कारण 7 लोगों की जान भी चली गई है। क्या किसी ने सोचा था कि सिर्फ एक रात की बारिश इतनी तबाही मचा सकती है?
बाढ़ ने कैसे किया कोलकाता को बेबस
कोलकाता में 24 घंटे में 247.5 मिमी बारिश हुई। ये आंकड़ा इतना चौंकाने वाला था कि पूरा शहर ही जैसे बर्फ़ से भीग गया हो। बारिश के कारण शहर के कुछ हिस्सों में पानी 3 फीट तक भर गया।
- एयरपोर्ट की स्थिति: कोलकाता एयरपोर्ट भी जलमग्न हो गया। इससे 30 फ्लाइट्स कैंसिल और 42 फ्लाइट्स देरी से उड़ीं। सोचिए, जब आप प्लान करते हैं, तो क्या कभी ऐसा हालात सोच सकते हैं?
- रेलवे और मेट्रो: हावड़ा और सियालदह रेलवे डिवीजन में भी पानी भर गया है, जिससे कई ट्रेनें रद्द कर दी गईं। यही नहीं, कोलकाता के शहीद खुदीराम और मैदान मेट्रो स्टेशन के बीच मेट्रो सर्विस भी पूरी तरह से ठप हो गई। ऐसे में यात्री कहां जाएं?
किसका था दोष, क्या बच सकती थी ये स्थिति?
अगर हम सोचें तो यह सच्चाई है कि जब मौसम खुद को निचोड़ने पर आ जाता है, तो हमारी सारी तैयारियां धरी की धरी रह जाती हैं। कोलकाता में लगातार बारिश की वजह से नदी और नाले उफान पर आ गए। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या हमारी व्यवस्थाएं इसे संभालने के लिए तैयार थीं? क्या हमने पहले से कोई तैयारी की थी?
इन घटनाओं से यह साफ है कि हमें सिर्फ बाढ़ और बारिश के बाद राहत के उपायों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। हमें पहले से ऐसी आपदाओं के लिए योजना बनानी चाहिए, ताकि जब ऐसी कोई स्थिति आए, तो हमें नुकसान का सामना कम से कम करना पड़े।
संकट में डूबे हुए लोग, लेकिन उम्मीद की किरण
इन मुश्किल हालातों में एक चीज जो साफ तौर पर नजर आई, वह है कोलकाता के लोगों का साहस। बेशक बाढ़ ने सब कुछ तबाह कर दिया, लेकिन ये लोग हार नहीं मान रहे। कुछ लोग अपनी जान की सलामती के लिए अपने घरों की छतों पर चढ़े हुए थे, तो कुछ लोग जलभराव के बीच भी अपनी दुकानें बचाने की कोशिश में लगे थे।

हर मुश्किल के बाद हमें एक उम्मीद की किरण नजर आती है, और यही वो समय है जब हमें एकजुट होकर इस संकट से निपटना होगा। बेशक यह चुनौती बहुत बड़ी है, लेकिन कोलकाता के लोग कभी भी हार नहीं मानते।
क्या अब कुछ बदल सकता है?
कोलकाता की बाढ़ ने यह सवाल खड़ा किया है कि हम अपनी शहरों की बुनियादी संरचना और आपदा प्रबंधन को कितना मजबूत कर पा रहे हैं। क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए और भी बेहतर उपाय किए जा सकते हैं?
यह सिर्फ कोलकाता का ही सवाल नहीं है, बल्कि यह पूरे देश का मुद्दा बन चुका है। अगर हम भविष्य में ऐसी आपदाओं से बचना चाहते हैं, तो हमें अपनी बुनियादी ढांचे की मजबूती और आपदा प्रबंधन प्रणालियों को पूरी तरह से अपडेट करना होगा।

आज हम सब साथ खड़े हैं इस संकट में, और यही हमारे इरादे को मजबूती देता है। जब तक हम एकजुट होकर एक-दूसरे का साथ देंगे, तब तक इस कठिन समय से बाहर निकलने में सफल होंगे
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