किश्तवाड़ की आपदा मचैल यात्रा का पहला पड़ाव बना त्रासदी का मैदान

कुछ लोग दर्शन करने आए थे, कुछ सेवा में लगे थे, कुछ दुकान पर बैठे थे… और कुछ बस एक कप चाय पी रहे थे… अचानक बादल फटा और सबकुछ ख़ामोश हो गया। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के चसोटी गांव में 14 अगस्त की दोपहर वो हुआ, जिसकी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी।
12:25 बजे बादल फटा, और मचैल माता यात्रा का पहला पड़ाव एक भीषण त्रासदी में बदल गया।आज तीसरा दिन है, 65 शव मिल चुके हैं, 200 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं, और 180 घायल अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। इनमें से 40 की हालत बेहद नाजुक है।
माँ के दर्शन नहीं, मलबे में अपने को ढूंढते रह गए लोग
यह हादसा तब हुआ जब हजारों श्रद्धालु मचैल माता यात्रा पर निकले थे। चसोटी, पड्डर घाटी का वो गांव है जहां यात्री रुकते हैं बसें, टेंट, लंगर, दुकानें… सब कुछ था वहां। बाढ़ और मलबा इतनी तेजी से आया कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। स्थानीय लोग बताते हैं कि बच्चे, बूढ़े, महिलाएं जो जहां था, वहीं दब गया। फेफड़ों में कीचड़ भर गया, पसलियां टूटीं, शरीर बिखर गए। कुछ को लोग पीठ पर लादकर अस्पताल तक लाए, लेकिन कई तो रास्ते में ही दम तोड़ गए।
रेस्क्यू में जुटा है पूरा सिस्टम, लेकिन जिंदा उम्मीदें कम होती जा रही हैं
अब तक 500 से ज्यादा लोगों को रेस्क्यू किया गया है। NDRF की 3 टीमें, सेना के 300+ जवान, SDRF, पुलिस और स्थानीय एजेंसियां चौबीसों घंटे मलबा खंगाल रही हैं। लेकिन वक्त निकलता जा रहा है…अब भी 200 से ज्यादा लोग लापता हैं, और हर गुजरता पल उन उम्मीदों को और कम करता जा रहा है।
75 लापता लोगों की डिटेल उनके परिजनों ने प्रशासन को सौंपी है। ड्रोन कैमरों से इलाके की निगरानी हो रही है, लेकिन मलबे की मोटी परतें और खतरनाक ढलानें रेस्क्यू को और मुश्किल बना रही हैं।
चसोटी की भौगोलिक रचना ही बनी मौत की वजह
पड्डर घाटी में स्थित चसोटी गांव समुद्रतल से करीब 3,000 मीटर की ऊंचाई पर है। यहां पहाड़ों पर ग्लेशियर हैं और बेहद ढलान वाले रास्ते हैं। जब बादल फटता है, तो पानी की रफ्तार किसी विस्फोट से कम नहीं होती। यात्रा का यह रूट जम्मू से किश्तवाड़ तक 210 किमी लंबा है, जिसमें से चसोटी तक सड़क है, और उसके बाद 8.5 किमी की पैदल चढ़ाई।

घर, दुकानें, लंगर, पुल कुछ नहीं बचा
इस त्रासदी में 16 से ज्यादा घर, सरकारी दफ्तर, होमस्टे, पुल, लंगर, दुकानें और यात्रियों की गाड़ियां बह गईं। जिन टेंटों में लोग रात बिताने आए थे, वो कब मलबे में बदल गए किसी को पता ही नहीं चला। कई शव इस तरह मिले कि उन्हें पहचानना तक मुश्किल था। एक स्थानीय दुकानदार का कहना है: “सुबह चाय बनाकर रखी थी यात्रियों के लिए… शाम होते-होते मेरी दुकान भी गई, मेरा बेटा भी।
सरकार ने राहत का भरोसा दिलाया, लेकिन क्या ये जख्म कभी भरेंगे?
LG मनोज सिन्हा ने आश्वासन दिया है कि जो घर तबाह हुए हैं, उन्हें फिर से बनाया जाएगा। CM उमर अब्दुल्ला ने चसोटी पहुंचकर ज़मीनी हालात देखे। लेकिन सवाल ये है जो मां-बाप बच्चे गंवा चुके हैं, जो महिलाएं पति को खो चुकी हैं, जो बच्चे अनाथ हो गए हैं… क्या ये टूटे दिल कभी फिर से जुड़ पाएंगे?
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Watch Now :-किश्तवाड़ आपदा – 200 लोग लापता….
